बकरीद से पहले जारी हुआ नया फरमान, इस बार नहीं दी जाएगी जानवरों की कुर्बानी

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लखनऊ। बकरीद से पहले मुस्लिम समुदाय के लोग इस त्योहार पर दी जाने वाली कुर्बानी का खुद विरोध कर रहे हैं। हर साल इस त्योहार पर लाखों की तादाद में बकरों की कुर्बानी दी जाती है। लेकिन इस बार बलि के विरोध में खुद मुस्लिम समाज खड़ा हो गया है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच यूपी के सह-संयोजक अधिवक्ता खुर्शीद आगा ने बकरे काटने के बजाए केक काटने का आग्रह किया है। बता दें, इस साल 1 सितंबर को  ईद-उल-अजहा (बकरीद) मनाई जाएगी।

‘हमारे पैगंबर ने किसी जानवर की कुर्बानी के लिए नहीं कहा है’

मंगलवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुर्शीद आगा ने कहा,  ‘कहीं भी बकरीद पर किसी भी बेजुबान जानवर की कुर्बानी को हमारे पैगंबर ने नहीं कहा है। हमारे किसी पैगंबर ने किसी जानवर की कोई कुर्बानी नहीं की है बल्कि रहमत बरती है।’

उन्होंने आगे कहा- ये कुर्बानी तो रहमत का पर्व है, जहां कुर्बानी के बाद भी जिंदगी मिली है। खुद रसूल ने जब अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने उसे जिंदगी बख्शी। इसी प्रकार बकरीद के दिन बेजुबान पशुओं का बेहिसाब कत्ल कहीं से जायज नहीं है।

दूध का केक काटकर मनाएं बकरीद

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच जानवरों की कुर्बानी के बिलकुल खिलाफ है। उनका कहना है कि बेजुबान जानवरों के कत्ल के बजाए दूध से बना केक काटा जाए। या फिर अपनी किसी बेहद खास चीज़ की कुर्बानी दी जाए। उन्होंने कहा है कि पिछले साल भी हमने केक काटकर बकरीद मनाई थी और इस साल भी हम ऐसे ही ये त्योहार मनाएंगे।

इसके अलावा राष्ट्रीय मुस्लिम मंंच ने कहा है कि अपने कार्यों व अपने व्यवहार से खास तौर से दूसरे धर्म में आस्था रखने वाले अपने पड़ोसियों को शिकायत करने का मौका नहीं दें। आपको संबंधों को तनावपूर्ण बनाने से बचना चाहिए और ज्यादा संयम बरतना चाहिए। आपको किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए।”

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