आज ही के दिन जली थी दिल्ली, एक साल बाद भी चल रही जांच

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को लगभग एक साल पूरा हो चुका है। 24 एवं 25 फरवरी 2020 को हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 581 लोग घायल हुए थे।

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली (North East Delhi) में हुए दंगों को लगभग एक साल पूरा हो चुका है। 24 एवं 25 फरवरी 2020 को हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 581 लोग घायल हुए थे। पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव के मुताबिक इन दंगों को लेकर कुल 755 एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें से 400 मामलों में पुलिस द्वारा 1818 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अधिकांश मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल हो चुका है।

पुलिस कमिश्नर ने दी जानकारी

पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बताया कि पुलिस ने दंगों के इन मामलों की निष्पक्षता के साथ जांच की है। पुलिस द्वारा दर्ज 755 मामलों में से 60 मामलों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है। इसके लिए क्राइम ब्रांच में तीन एसआईटी गठित हैं. इसके अलावा पूरी साजिश को लेकर स्पेशल सेल ने यूएपीए एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें उन लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है, जो दंगों के पीछे थे। इन मामलों के अलावा अन्य सभी एफआईआर की जांच लोकल पुलिस कर रही है। पुलिस ने दंगे के समय सभी शिकायतों पर एफआईआर की ताकि उन्हें यह न लगे कि उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही।

तकनीक के सहारे हुई साइंटिफिक जांच

पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस द्वारा दर्ज सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। निष्पक्ष जांच के लिए ही पुलिस ने ज्यादा तकनीक का सहारा लिया, क्योंकि इसके साक्ष्य कभी गलत नहीं होते। वीडियो एनलेटिक के जरिए सीसीटीवी फुटेज में मौजूद आरोपियों की पहचान की गई। ई-वाहन एवं पुलिस के पास मौजूद डाटाबेस से आरोपियों की पहचान की गई। फेसिअल रिकॉग्निजेशन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया। इनकी मदद से 231 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। इनके अलावा एफएसएल की भी मदद महत्वपूर्ण साइंटिफिक साक्ष्य के लिए ली गई है। मोबाइल से जो डेटा डिलीट किए गए, उन्हें हासिल किया गया। लोकेशन के जरिये भी आरोपियों की पहचान की गई. डीएनए, फिंगरप्रिंट और फेसिअल रिकंस्ट्रक्शन का भी इस्तेमाल किया गया।

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