पीएफ (PF) अकाउंट को लेकर बदले कुछ नियम, आपके चेहरे पर भी छा जाएगी खुशी

अगर आपने भी एक कंपनी को छोड़ कर दूसरी कंपनी ज्वाइन कर ली है। तो ये खबर आपको खुश कर सकती है। दरअसल हम यहां बताने जा रहे हैं प्रोविडेंट फंड के बारें में जिसे अधिकतर लोग दूसरी कंपनी ज्वाइन करने के बाद भूल जाते हैं।

नई दिल्ली: कोरोना काल में लोगों ने नौकरी को लेकर काफी बुर दिन देखें। लोगों ने अपनी नौकरियां गंवा दी और जब नौकरी मिली भी तो उनकी सैलरी काट ली गई। कहीं सैलरी का 50 प्रतिशत कटा तो कहीं 40 प्रतिशत। लोगों ने बड़े शहरों को छोड़कर छोटे शहर, कस्बा और गांवों की तरफ रुख कर लिया। साथ ही लोगों ने एक कंपनी को छोड़कर दूसरी कंपनी को ज्वाइन कर लिया।

अगर आपने भी एक कंपनी को छोड़ कर दूसरी कंपनी ज्वाइन कर ली है। तो ये खबर आपको खुश कर सकती है। दरअसल हम यहां बताने जा रहे हैं प्रोविडेंट फंड के बारें में जिसे अधिकतर लोग दूसरी कंपनी ज्वाइन करने के बाद भूल जाते हैं।

बता दें कि पहले 36 महीने तक कोई Contribution नहीं होने पर कर्मचारी का पीएफ अकाउंट निष्क्रिय खाते (In-Operative Account) की श्रेणी में डाल दिया जाता था। इसलिए अपने खाता को एक्टिव रखने के लिए कुछ रकम तीन साल से पहले निकालनी होती थी। लेकिन अब जो नए नियम बनें हैं उसके तहत अगर कर्मचारी 55 साल की उम्र में रिटायर (Retirement) होता है और उसके 36 महीने के भीतर जमा रकम निकालने के लिए आवेदन नहीं करता है तो पीएफ अकाउंट निष्क्रिय होगा। मतलब की कंपनी छोड़ने के बाद भी आपके पीएफ अकाउंट पर इंटरेस्ट यानी की ब्याज 55 साल तक मिलता रहेगा।

यह भी पढ़ें: रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं, जानें कितना है GDP ग्रोथ?

नियमों के मुताबिक, कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं करने पर पीएफ अकाउंट निष्क्रिय नहीं होता है, लेकिन इस दौरान मिले ब्याज पर टैक्स लगता है। पीएफ खाते के निष्क्रिय होने के बाद भी क्लेम नहीं किया तो रकम सीनियर सिटीजंस वेलफेयर फंड (SCWF) में चली जाती है।

यह भी पढ़ें: Bigg Boss 14: रुबीना दिलैक गुस्से में फेंकी इस कंटेस्टेंट पर पानी हुई नॉमिनेट

Related Articles

Back to top button