बचपन का नया साल, भूले तो नहीं

फूल है गुलाब का सुगंध लीजिए, पहला दिन है नया साल का आनंद लीजिए।

लखनऊ: बचपन शब्द का जिक्र होते ही हम सभी अपनी-अपनी बचपन की रंग-बिरंगी यादों में कुछ देर के लिए चले जाते हैं। और मन ही मन सोचते है कि फिर से उस बचपन में वापस लौट जाएं। हम सभी के बचपन की बहुत सी ऐसी यादें होती है जिनको हम भूल नही पाते। उन्हीं खूबसुरत यादों के पिटारा से एक याद बचपन वाला नया साल  भी है।

आज कल का नया साल मनाने का तरीका बचपन वाले नया साल से बिल्कुल अलग है। आज के लोग आधुनिक तरीके से न्यू ईयर को मनाते हैं। जैसे पार्टी करना, देर रात तक घूमना, ड्रिंक करना, शोर करना, ये सब शामिल हैं।

आते हैं अपने बचपन वाले नए साल की तरफ, दिसम्बर महीने के अन्तिम में दुकानों में रंगबिरंगी ग्रीटिंग्स कार्ड सजी होती थी। बड़ा दिन के बाद यानी 25 दिसम्बर के बाद से हम अपनी न्यू ईयर की तैयारी करने में जुट जाते थे।

हमारा मासूम मन

बचपन का हमारा मासूम मन ये सोचता था कि आने वाला नया साल यानि 1 जनवरी को सब कुछ बदल जायेगा या कुछ नया होने वाला होगा। बस इसी बात को सोच के मन उत्साहित होता था और हम पैसे इकट्ठा करने लगते थे ताकि कवर वाले रंगबिरंगी ग्रीटिंग्स कार्ड खरीद सकें।

जो थोड़ा खास दोस्त होता था उसके लिए थोड़ी अच्छा वाली कार्ड खरीदते थे। और 2 या 3 दिन पहले से ही उस पर लिखावट तथा सजावट का काम करना शुरु कर देते थे। एक छोटी से कार्ड पे अपने अलग-अलग रंग के कलम से ज्यादा से ज्यादा लिखने का प्रयास करते थे।

कार्ड के कोने कोने पर संदेश तथा शायरी लिख कर भर देते थे। उस वक्त मेरे सारे दोस्त शायर हुआ करते थे। हमें TO  और FROM का मतलब नही पता था लेकिन भेजने वाला और पाने वाला जरुर लिखते थे और अपनी भावनओं को लिखकर सबको नए साल की शुभकामना भेजते थे।

एक नई शुरुआत

न्यू ईयर के दिन एक नई शुरुआत सुबह ठंडी में नहा कर स्कुल जाने से होती थी क्यूंकि घर के सभी बड़े लोग ये कहते थे कि जो नया साल के दिन नहीं नहाता है वह पूरा साल बासी रहता है और कुछ बातों को नए साल से जोड़ दिया जाता था। जो आज के दिन झूठ बोलता है वह पूरा साल झूठ बोलता है, पहले दिन स्कूल नही गए तो सालभर छूट्टी मारोगे एसे बातों का डर हमारे मन में बैठा दिया जाता है।

हम भी पहले दिन स्कूल खुशी-खुशी जाते थे और सबको न्यू ईयर विश करते तथा अध्यापक का उस दिन पैर छूकर आशिर्वाद जरुर लेते थे।तो ऐसा होता था हमारा मासूमीयत से भरा हुआ नया साल।

चलते चलते तब वाले ग्रीटिंग्स कार्ड पर लिखी जाने वाली कुछ  लाइनें

1- सोया मेथी पालक हो,नया साल मुबारक हो।

2- शीशी भरी शराब से सीसा चटक गया,

पप्पू की मूछ में चुहा लटक गया ।

3-लिख रहा था शायरी काट लिया मच्छर,

यार तेरी याद में का भूल गया अक्षर।

4- काले कोट में कढ़ाई नहीं होती,

दोस्त तेरी याद में पढ़ाई नहीं होती।

5- फूल है गुलाब का सुगंध लीजिए,

पहला दिन है नए साल का आनंद लीजिए।

6-  टमाटर के रस को जूस कहते हैं,

ग्रीटिंग न देने वाले को कंजूस कहते हैं।

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