गंगा को साफ करने के लिए उठा एक और कदम

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देहरादून। गंगा की सफाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी काफी गंभीर है और समय-समय पर जरूरी दिशा निर्देश भी जारी करता है। इसी कड़ी में एनजीटी ने प्रदेश में अवैध रूप से चल रही 11 औद्योगिक इकाईयों और होटल्स को फौरन बंद करने को सरकार से कहा है। एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को स्वच्छ गंगा के लिए दिए आदेशों का उल्लंघन होने पर जमकर फटकारा है।  इसके अलावा सरकार से दो सप्ताह में ट्रिब्यूनल के सामने विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। इस हलफनामे मे सरकार को ये साफ करना होगा कि एनजीटी के दिसंबर 2015 के फैसले पर कितना अमल किया गया। एनजीटी ने ये भी कहा है कि हलफनामा सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी का नहीं होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी।

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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को एमसी मेहता के मामले की सुनवाई की। बेंच का यह आदेश मीडिया द्वारा प्रकाशित कुछ रिपोर्ट्स के आधार पर लिया गया। इन रिपोर्ट्स में कुछ इकाईयों और होटल्स द्वारा गंगा सफाई में बाधा पहुंचाने का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में इस बात को भी प्रमुखता से उठाया गया कि नए वर्ष के मौके पर एनजीटी के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन कर ऋषिकेश में गंगा किनारे कैंपिंग गतिविधि भी की गई।

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कैंपिंग गतिविधि पर मांगा जवाब

एनजीटी ने रिपोर्ट्स को आधार मानते हुए कहा कि ऋषिकेश में नदी किनारे प्रतिबंधित दायरे में राफ्टिंग और कैंपिंग गतिविधि संचालित की जा रही है। राज्य सरकार के साथ ही संबंधित विभाग ट्रिब्यूनल के फैसलों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसलिये सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में अलग से हलफनामा दाखिल करके पूरी स्थिति को स्पष्ट करें।

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उद्योग और अवैध होटल्स को बंद करने के आदेश

एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि जिन अवैध होटल और ढाबों को क्लोजर नोटिस देना था उनका क्या हुआ? सरकार ने पक्ष रखते हुए कहा कि 21 दिसंबर को इस संबंध में प्रशासन और निगम को पत्र जारी किया गया था। इसमें 8 औद्योगिक इकाइयों और 3 होटलों को बंद करने को कहा गया था। इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से इनकी बिजली-पानी की सप्लाई भी रोकने को  कहा गया था। हालांकि कार्रवाई के संबंध में शासन के पास कोई जवाब नहीं आया। जिसपर बेंच ने नाराजगी जताते हुए आदेश दिया कि हरिद्वार और ऊधमसिंनगर के डीएम, एसपी और निगम इन 8 इंडस्ट्री और 3 होटल्स को फौरन बंद करायें। और कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट दो सप्ताह में बेंच के सामने रखें।

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गोमुख से हरिद्वार तक के लिए था एनजीटी का आदेश

गौरतलब है कि 10 दिसंबर को एनजीटी ने गंगा सफाई के पहले चरण का फैसला सुनाया था। इस फैसले के तहत गोमुख से हरिद्वार तक गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए प्लास्टिक पर पूरे तौर पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि इस दिशा में सरकार के उदासीन बने रहने और आदेशों के उल्लंघन की खबरें आने के बाद एनजीटी ने और सख्त रुख अपना लिया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को संज्ञान में लेते हुए ट्रिब्यूनल ने अब प्रदेश सरकार से हलफनामा दाखिल कर जवाब देने के लिये कहा है।

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