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बढ़ते तेल के दामों पर बोली वित्त मंत्री ‘यह एक धर्म संकट है’

नई दिल्ली: एक दौर वो जब देश में बढ़ते प्याज के दामों ने लोगों को हैरान कर दिया था. एक दौर आज भी है जिसका जिक्र चारो-तरफ है. आज प्याज से नहीं बल्कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से लोग परेशान है. कई राज्यों में इसका जबरदस्त विरोध हो रहा है. वहीँ ऐसे कई शहर है जहां पेट्रोल-डीजल की कीमत सैकड़ा मारने के कगार पर है.

जाहिर है जब रोजमर्रा की इस्तेमाल में आने वाली चीजों के दाम में इतना जबरदस्त उछाल आएगा तो इसपर सवाल भी किये जायेंगे. अहमदाबाद में गुरुवार को देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक कार्यक्रम के दौरान जब यह पूछा गया कि कीमतों में गिरावट कब आएगी. इसपर उन्होंने कहा कि वह नहीं बता पाएंगी कि कब, क्योकि यह एक धर्म संकट है।

केंद्र और राज्य सरकार को करनी होगी बात

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोल और डीजल पर करों को कम करने के लिए आपस में बात करनी चाहिए। हाल के समय में वाहन ईंधन कीमतें ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं पर बढ़े दामों के बोझ को कम करने के लिए केंद्र और राज्यों को बात करनी चाहिए।

उपभोक्ताओं का बोझ कम करने की जरूरत

उन्होंने कहा कि यह तथ्य छिपा नहीं है कि इससे केंद्र को राजस्व मिलता है। राज्यों के साथ भी कुछ यही बात है। ”मैं इस बात से सहमत हूं कि उपभोक्ताओं पर बोझ को कम किया जाना चाहिए। इससे पहले दिन में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर करों को कम करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित कार्रवाई की जरूरत है।

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