शराबबंदी पर नीतीश ने दिखाई नरमी, सख्त कानूनों में किया बड़ा बदलाव

0

पटना। आज जहां एक ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ मुलाक़ात को लेकर सीटों के बंटवारे की चर्चा प्रबल है, वहीं राज्य में उनके द्वारा उठाये गए क्रांतिकारी कदम को लेकर भी सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है। दरअसल शराबबंदी पर नीतीश कुमार बैकफुट पर हो लिए हैं। शाराब को बैन करने के बाद इस फैसले को नियमित बनाये रखने के लिए जो सख्त क़ानून नीतीश सरकार ने बनाये थे, अब उस पर नरमी दिखाई गई है। इसके तहत शराबबंदी को लेकर कानून में कई अहम बदलावों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

रिपोर्ट: अमेरिका और यूरोप से भी 5 गुना ज्यादा ब्लैक कार्बन…

नीतीश कुमार

फिलहाल इस कदम के पीछे भले ही सीएम नीतीश का मंतव्य कुछ और रहा हो, लेकिन इस फैसले को राजनीतिक फायदे से जोड़ा जाने लगा है।

खबरों के मुताबिक़ नीतीश की इस नरमी से एक तरफ जहां विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिला है, वहीं इन आरोपों पर भी मुहर लगती दिख रही है कि कानून को दुरुपयोग हो रहा था।

बता दें बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र (20 जुलाई) में इस संशोधन बिल को पेश किया जाएगा।

दिल्ली के नरेला में सरकारी स्कूल में मिड डे मील खाने…

पहले के कानून के मुताबिक पहली बार शराब पीते हुए पकड़े जाने पर गैरजमानती धाराएं लगती थीं। यानी जेल जाना तय होता था। 5 साल की सजा का प्रावधान था। अब इसे जमानती बना दिया गया है। अब 50,000 रुपये की फाइन या तीन महीने की जेल का प्रावधान किया गया है। धाराएं जमानती और असंज्ञेय होंगी। यानी जेल जाने से बचा जा सकेगा।

घर में शराबखोरी पकड़े जाने पर 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होती थी। अब इसमें ढील देते हुए कार्रवाई केवल उस शख्स के खिलाफ होगी जिसने शराब का सेवन किया होगा।

पहले शराबबंदी का उल्लंघन करने पर सामूहिक जुर्माने का प्रावधान था। डीएम के पास अधिकार था कि किसी समूह, समुदाय या खास इलाके, गांव में शराबबंदी के उल्लंघन पर सामूहिक जुर्माना लगा सके। अब सामूहिक शराब के सेवन पर तो सख्ती है, लेकिन किसी समूह, समुदाय, खास इलाके या गांव पर लगने वाले सामूहिक जुर्माने को प्रावधान को समाप्त करने की अनुशंसा की गई है।

दिल्ली के कनॉट प्लेस के नाम दर्ज हुआ खास वर्ल्ड रिकॉर्ड

पहले शराब का निर्माण, उसकी तस्करी और बिक्री करने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। अब पहली बार यह जुर्म करने वाले को पांच साल की सजा मिलेगी। दोहराने पर 10 साल की सजा का प्रावधान।

पहले शराब या शराब की खाली बोतलों की बरामदगी पर भी घर, वाहन और जमीन को सीज करने का प्रावधान था। अब शराब बरामदगी के बाद घर, वाहन और जमीन को जब्त नहीं किया जाएगा। हालांकि अगर तस्करी में इनका इस्तेमाल हो रहा है तो इन्हें जब्त किया जाएगा।

आपको बता दें कि विपक्ष नीतीश कुमार की शराबबंदी के फैसले के बाद से ही लगातार हमलावर बना रहा। विपक्ष के लगातार दबाव के बाद सीएम नीतीश कुमार ने भी स्वीकार किया था कि इस ऐक्ट के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग हुआ। तब उन्होंने इसमें संशोधन करने की बात कही थी, जिन्हें बुधवार को कैबिनेट ने मंजूर भी कर लिया।

विपक्ष के नेताओं का आरोप था कि शराबबंदी की आड़ में दलितों और पिछड़ों को गिरफ्तार कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से अबतक 1।5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

loading...
शेयर करें