ये तो हुए कंगाल प्रधानी से हाय दिल को लगाके

प्रतापगढ़। गांव के विकास के लिए सरकारी स्तर पर आ रही योजनाओं के धन को ध्यान में रखते हुए कुछ लोग अपनी पूरी ताकत लगा दिये थे।  प्रधानी का चुनाव जीतकर करोड़पति बनने का सपना देखने वाले अधिकांश प्रत्याशी कंगाली के शिकार हो गए हैं।

हुआ ये कि आरक्षित सीटों पर कई प्रत्याशियों ने खेत और जेवरात गिरवी रखकर चुनाव लड़ा। मगर हार का मुंह देखने के बाद उनकी हालत खराब हो गई है। चुनाव में अधिकांश प्रत्याशियों ने वोट के बराबर नोट खर्च किया। लेकिन वोटर इनकी उम्मीदों पर खरे नही उतरे इस वजह से इनकी स्थिति दयनीय हो गई है। कमाया धन भी खर्च हो चुका है।

मतदाताओं ने भी साड़ी, रुपये लेने के साथ शराब भी जमकर पी, मगर प्रत्याशी चयन में दिल के साथ दिमाग का भी इस्तेमाल किया। हार का मुंह देखने के बाद उनकी बोलती बंद हो गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कई ऐसे चौंकाने वाले परिणाम आए हैं जिससे प्रत्याशी के साथ उनके प्रतिद्वंद्वी भी स्तब्ध हैं।

रुपये के दम पर चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों ने मतदाताओं का मुंह बंद करने के लिए निजी धन से हैंडपंप और सोलर लाइट भी बांटी, मगर जनता ने ऐसे लोगों को भी ठुकरा दिया है। अधिकांश प्रत्याशियों ने नेताओं का प्रभाव, धन-बल का प्रयोग कर चुनाव अपने पक्ष में करना चाहा, मगर ऐसे लोगों को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है।

कई प्रत्याशी तो ऐसे थे, जिनके समर्थक उनकी जीत पहले से ही पक्की बता रहे थे। मगर अंतत: उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार का मुंह देखने वाले प्रत्याशी घरों में कैद होकर चुनाव में खर्च का ब्यौरा जुटाते रहे।

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