नहीं रहें इतिहासकार प्रो. डीएन झा, अयोध्या मामले में की थी बड़ी खोज

नई दिल्ली: मध्यकालीन भारतीय इतिहास के विशेषज्ञ माने जाने वाले प्रोफेसर द्विजेंद्र नारायण झा (DN Jha) का गुरुवार को निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे जिसके बाद आज गुरुवार शाम को (DN Jha) ने अपने घर में अंतिम सांस ली। वो भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् के सदस्य भी थे। उन्होंने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मसले पर भी खोज की थी। राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उन्होंने साक्षात्कार में कोर्ट के फ़ैसले को निराशाजनक बताया था। उन्होंने मस्जिद के नीचे मंदिर होने की बात को नकारा था।

डीएन झा दिल्ली विश्वविद्याल में इतिहास के प्रोफेसर भी थे इसके अलावा वे इंडिन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च के सदस्य भी थे। वे शुरुआत में पटना विवि में प्रोफेसर थे। डीएन झा अपनी किताब ‘द मिथ ऑफ होली काऊ’ को लेकर काफी विवादों में भी रहे थे। उन्होंने लिखा था, प्राचीन भारत में गोमांस खाया जाता था। उनकी किताब इतनी पॉपुलर हुई कि साल 2002 से लेकर साल 2017 के बीच इस किताब के 26 एडिशन छापे गए।

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हिंदू धर्म में आस्था की नजर से देखी जाने वाले गोवंश को लेकर ऐसी खोज की थी जिसके लिखने के बाद काफी विवाद हुआ था। क्योंकि उन्होंने इस किताब में लिखा था कि वैदिक और उत्तर वैदिक काल में हिंदुओं में गोमांस भक्षण किया जाता था।

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