दिल्लीवासियों को प्रदूषण से कोई राहत नहीं, सुबह ही AQI पहुंचा 440 के पार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, दिल्‍ली के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद का भी बुरा हाल है और एक्यूआई 400 से अधिक है। 

नयी दिल्ली:  राजधानी के लोगों को शुक्रवार भी प्रदूषण से कोई राहत नहीं मिली। दिल्ली में आज सुबह एयर पोलुशन इंडेक्स (एक्यूआई) लगभग सभी क्षेत्रों में 400 को पार गया जो ‘गंभीर’ श्रेणी का माना जाता है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार आनंद विहार में एक्यूआई का स्तर 442, आरके पुरम में 407, द्वारका में 421 और बवाना में 430 रहा।

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण की विकटता को ध्यान में रखकर दीपावली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक 30 नवंबर तक जारी रहेगी। आसमान में घुएं की चादर और दमघोंटू वायु से सबसे ज्यादा सांस के मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं। वृद्धों और बच्चे भी प्रदूषण से परेशान हैं।

बच्चे, बुजुर्गों और कोविड मरीजों के लिए परेशानी बढ़ेगी

हवा खराब होने से बच्चे और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कोविड मरीजों और जिन लोगों को सांस लेने परेशानी होती है उनके लिए खतरा और भी बढ़ गया है। प्रदुषण के मामले में गुरूवार को दिल्ली ने इस साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए वायु गुणवत्ता 450 दर्ज की है।

पड़ोसी राज्यों में पराली जलना,  हवा की गति रूकना प्रदुषण का मुख्य कारण

तापमान कम होने और आस पास के राज्यों में पराली जलाए जाने के कारण होने वाले धुंए से क्वालिटी इंडेक्स में प्रदुषण ज्यादा खराब हुई है। हवा मे गति ना होने कारण भी दिल्ली में प्रदुषण स्तर नीचे चला गया है। खराब प्रदुषण में पराली जलाने की 42 फीसदी हिस्सेदारी है। दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि होती जा रही है।

प्रदूषण में सांस लेना एक सिगरेट पीने के बराबर

60 माइक्रोग्राम प्रति क्युबिक मीटर तक पीएम 2.5 को सुरक्षित माना जाता है।  एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,  सर गंगाराम अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 22 माइकोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर का शरीर में जाना एक सिगरेट पीने के बराबर है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, दिल्‍ली के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद का भी बुरा हाल है और एक्यूआई 400 से अधिक है।

गुणवत्ता निगरानी केन्द्र ने बताया कि हवा के बहाव में स्थिरता, पड़ोसी शहरों में पराली जलाए जाने के मामले में वृद्धि ने प्रदुषण स्तर को चिन्ताजनक बना दिया है। करवाचौथ के मौके पर पटाखों के जलाए जाने को भी हवा खराब होने का एक कारण माना जा रहा है।

एक्यूआई को शून्य से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 के 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’’ माना जाता है।

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