चिट्ठियां ही नहीं अब अस्थियां भी गुम करने लगा डाक विभाग, पढें पूरा मामला

देहरादून। यूं तो अक्सर आपने डाक विभाग के चिट्ठियां गुम होने के मामले पढ़े होंगे , लेकिन आज हम आपको एक नया मामला बताने जा रहे हैं, जहां कोई चिट्ठी नहीं बल्कि एक पिता की अस्थि गुम हो गई है। मामला उत्तराखंड का है जहां एक बेटा डाक विभाग की लापरवाही से अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन नहीं करा सका। ऋषिकेश निवासी शैलेन्द्र नेगी का कहना है कि उनके पिता गंभीर सिंह नेगी जर्मनी के होटल में काम करते थे।

जानकारी के मुताबिक जर्मनी में मृत्यु हो जाने के बाद खबर थी दूतावास से पिता की अस्थियों को डाक के माध्यम से भेजा गया है, लेकिन बेटे शैलेन्द्र का कहना है कि पिछले एक साल वह डाक के चक्कर काट रहा है जिसके बाद अभी तक उसे अस्थियां नहीं मिल सकी है।

बताया जा रहा है 9 जनवरी 2017 को गंभीर सिंह नेगी का देहांत जर्मनी में हो गया था। जिसके बाद वहां मौजूद गढ़वाल के कुछ लोगों ने वहीं पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। जिसके बाद कहा गया था कि उनकी अस्थियों को डाक के माध्यम से भेजा जा चुका है। मृतक गंभीर सिंह नेगी के बेटे का आरोप का ऋषिकेश के डाक सिस्टम की वजह से पिछले एक साल से वह अपने पिता की अस्थियों को ढ़ूढ रहा है, लेकिन अभी तक उसे वह अस्थियां मिल नहीं पाई हैं। साथ ही उसने ऋषिकेश के डाक विभाग पर पिता की अस्थियों को गुम हो जाने का आरोप भी लगाया है।

लगाए गए इस आरोप पर डाक विभाग ने भी सफाई देते हुए कहा है कि उनके पार्सल को ऋषिकेश के इंदिरानगर स्थित घर के पते पर भेजा गया था, लेकिन वहां किसी के मौजूद न होने पर पार्सल वापस आ गया था।

Related Articles