श्रीहरि बोरिकर-नोटा बेस्ट नहीं, यूजलेस है

लखनऊ। अखिल भारतीय विद्यार्थी ​परिषद(अभाविप) परिषद के राज्य विश्वविद्यालय प्रमुख श्रीहरि बोरिकर ने कहा की “भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘नोटा’ का उपयोग सार्थक नहीं, घातक है। नोटा बेस्ट नहीं, यूजलेस है”।

उन्होंने कहा कि ‘नोटा’ के इस्तेमाल करने से लोकतंत्र को खतरा है। ‘नोटा’ किसी को विधायक बन्ने से नही रोक सकता है। अभी तक के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो ‘नोटा’ के प्रयोग से अच्छे लोगों का ही नुकसान हुआ है। कहा कि विद्यार्थी परिषद नोटा का पुरजोर विरोध कर रही है। नोटा का प्रयोग न करने के लिए परिषद सोशल मीडिया से लेकर धरातल पर जोर-शोर से प्रचार कर रही है। परिषद की ओर से कॉलेज, कैंपसों से लेकर गली-चौराहों पर नुक्कड़ नाटक करके नोटा के खिलाफ माहौल तैयार किया जा रहा है।

श्रीहरि बोरिकर ने कहा कि ‘नोटा’ इस्तेमाल करने की बजाय मतदाताओं को किसी ना किसी उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ‘मतदान’ जरुरी है। सभी को मतदान करना चाहिए। कहा कि इस बार राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और पहचान के लिए मतदान करें। कहा कि वर्तमान समय में चुप रहने से अच्छा है कि ‘हां’ या ‘ना’ में वोट के जरिये जवाब दें।

उल्लेखनीय है कि 27 सितम्बर, 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में मतदाताओं को नोटा यानी सभी उम्मीदवारों को खारिज करने का विकल्प दिया था। सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि यह राजनीतिक व्यवस्था को साफ करने की दिशा में अहम फैसला होगा।
विद्यार्थी परिषद के अखिल भारतीय प्रकाशन व प्रशिक्षण प्रमुख मनोजकांत ने कहा कि नोटा उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ को भी नकारने की व्यवस्था है। नोटा का चिंतन ही छोटा है। कहा कि पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग ही इस बटन को दबा रहे हैं। नोटा दबाने से बेकार लोग चुनकर आ रहे हैं।आह्वान किया कि देशहित में सर्वश्रेष्ठ का चुनाव करें। मतदान अवश्य करें और जवाबदेह बनें।

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