अब देश की सभी ट्रेनों की निगरानी होगी अंतरिक्ष से , आसान हुआ सफर…

आज के समय में वैज्ञानिको ने काफी तरक्की कर ली हैं. बतादें की भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो सिर्फ रॉकेट से अंतरिक्ष में सैटेलाइट ही नहीं छोड़ता बल्कि चांद पर अपना मिशन भी भेजता हैं.खबरों के मुताबिक आपदा प्रबंधन में मदद और साथ ही बचाव कार्य का भी रास्ता दिखता हैं.

खबरों के मुताबिक इसरो का ध्येय वाक्य है – अंतरिक्ष विज्ञान में अनुसंधान व ग्रहीय अन्वेषण के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना. जहां इसरो ने 2011-12 में GEO-aided GEO Augmented Navigation (GAGAN) प्रणाली की शुरुआत की थी. 2013 से यह पूरी तरह से लागू हुआ. शुरुआत में यह सिर्फ भारतीय आकाश में विमानों के आवागमन में मदद कर रहा था. यानी उनकी गति, ऊंचाई, दिशा निर्धारण आदि.

लेकिन अब यह रेलवे की मदद भी कर रहा है. देश में किस समय कितनी ट्रेनें चल रही हैं. कब कौन सी ट्रेन किस पटरी पर जाएगी. कितनी गति में चलेगी. कहां पहुंची, कहां रुकी आदि सारी जानकारी अब रेलवे के अधिकारियों को मिल रही है. इसरो के गगन की वजह से ट्रेनों के परिचालन में आसानी हुई है.

दरअसल देश में करीब 12 हजार लोकोमोटिव इंजन हैं. इनमें से करीब 6000 में गगन के सिस्टम लग चुके हैं. यानी रेलवे के आधे इंजनों की निगरानी इसरो के गगन प्रणाली के जरिए अंतरिक्ष से की जा रही है.

इसमें 120 करोड़ रुपए का खर्च आया है. गगन प्रणाली को इसरो के जीसैट सीरीज के सैटेलाइट चला रहे हैं. ये वही सैटेलाइट हैं जो देश की सेनाओं की भी मदद करते हैं. देश के कई मिसाइल सिस्टम भी इस प्रणाली का उपयोग करते हैं. इस प्रणाली के उपयोग से अभी रेलवे विभाग को रोजाना 3 करोड़ से ज्यादा अपडेट मिल रहे हैं. जबकि, जनवरी 2019 में इसे 5 लाख अपडेट मिलते थे. अक्टूबर 2020 तक देश के सभी ट्रेन इंजन गगन प्रणाली से जुड़ जाएंगे.

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