अब हिमाचल से भी आसान हुआ जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदना

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय के द्वारा जारी किये गए गाइलाइंस के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अब जमीन खरीदना हिमांचल और लद्दाख से भी ज्यादा आसान हो गया है। जम्मू-कश्मीर में पहले राज्य के बाहर का कोइ भी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता था। परन्तु अब किसी भी राज्य का व्यक्ति वहां जमीन खरीद सकता है।

रोजगार के पैदा होंगे अवसर

नए गाइडलाइंस के सन्दर्भ में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की जरूरत है और जम्मू-कश्मीर में इंडस्ट्री बननी चाहिए। इससे वहां की आम जनता को भी रोजगार के कई अवसर मिलेंगे। हालांकि खेती वाली जमीनों के लिए अभी भी पुराने नियम ही रहेंगे।

जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने से पहले कश्मीर की ही कोई महिला यदि दूसरे राज्य के व्यक्ति से शादी कर लेती है तो शादी के बाद वो कश्मीर में जमीन या फ्लैट नहीं खरीद सकती थी। 2019 में मोदी सरकार द्वारा संविधान की धारा 370 हटा दिये जाने के बाद से ही कश्मीर में बाहरी राज्य के व्यक्तियों का कश्मीर में रहने और बस जाने का रास्ता खुल गया था पर इसके लिए अभी तक कोई गाइडलाइंस नही दी गयी थी कि कोई वहां पर कैसे जमीन खरीद सकता है।

12 कानूनों को खत्म कर 26 नए कानून बनाए गए

कश्मीर में इस साल जम्मू-कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन ऑफ सेंट्रल लॉज थर्ड ऑर्डर, 2020 का नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में भूमि खरीदने के मामले में डेवलपमेंट एक्ट की धारा के तहत 12 कानूनों को खत्म कर 26 नए कानून बनाए गए। धारा में किए गए बदलाव में ‘राज्य के स्थायी नागरिकʼ शब्द को हटा दिया गया है।

कश्मीर में जमीन खरीदना आसान

अब कश्मीर की तुलना में हिमांचल में जमीन खरीदना ज्यादा कठिन है। हिमांचल प्रदेश में टेनेन्सी ऐंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 118 कश्मीर की धारा 370 की तरह ही है। धारा 118 के कारण कोई भी बाहरी व्यक्ति हिमांचल में जमीन नहीं खरीद सकता। यहां तक कि वहां का किसान गैर कृषि वाले राज्य के व्यक्ति को भी अपनी जमीन नहीं बेच सकता है। अगर बाहर के व्यक्ति को हिमांचल में किसी कार्य के लिए जमीन लेना हो तो उसे सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है।

लद्दाख में अभी भी जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा हुआ है। लद्दाख की 90 फीसदी जनता जनजातीय है और यह चीन की सीमा से सटा हुआ हैँ।

गौरतलब है कि 2019 में संसद में बहुमत के साथ प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर में संविधान की धारा 370 और धारा 35A को जो कि किसी बाहरी व्यक्ति को जमीन ना खरीद पाने को बाध्य करता था, निष्क्रिय कर दिया गया था। जम्मू- कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बांट दिया गया था।

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