अब निजी अस्पतालों में खांसी-बुखार के इलाज से पहले कोरोना टेस्ट जरूरी

कर्नाटक: उडुपी जिले में निजी अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के उपचार के लिए आने वाले मरीजों का कोरोना वायरस टेस्ट करना अनिवार्य होगा।

जिला उपायुक्त जी जगदीश ने गुरुवार को एक बैठक में कहा, “सामान्य रूप से लोग अब कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एहतियातन उपाय को लेकर गंभीर नहीं हैं। इससे कोरोना की दूसरी लहर की संभावना है। जिसे नियंत्रित किया जाना जरूरी है। इसलिए अब निजी और सरकारी अस्पतालों को जिला प्रशासन के साथ उन मरीजों की जानकारी साझा करनी होगी, जो सर्दी, खांसी, बुखार या थकान की समस्या लेकर अस्पताल में इलाज के लिए आए हैं।

उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अगर अस्पताल बिना कोरोना टेस्ट किए ऐसे मरीजों का इलाज करते हुए पाए जाते हैं तो उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। वहीं ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी जो जिला प्रशासन में पंजीकरण कराए बिना मरीजों का इलाज करते हैं।”

उपायुक्त ने लिंग परीक्षण पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उडुपी जिले में वर्तमान में पुरुष और महिला लिंगानुपात 1000: 956 है। अगर कोई व्यक्ति कहीं भी लिंग परीक्षण करते हुए पाया जाता है तो उसे तीन साल की सजा होगी और लिंग परीक्षण कराए जाने के बारे में सूचना देने वालों को 50000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को जैव-चिकित्सा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करने और अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

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