दिव्यांग बेटी की गुहार अब तो सुनो सरकार, योगी जी आपका सरकारी तंत्र धृतराष्ट्र बन गया है !

उठने-बैठने और चलने-फिरने से मोहताज है दिव्यांग बेटी मोनिका

दिव्यांग मोनिका के लिए सरकारी तंत्र धृतराष्ट्र बन चुका है. 24 साल से चारपाई पर जिंदगी व्यतीत कर रही मोनिका का चिकित्सकों ने दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बनाया. उठने-बैठने और चलने-फिरने से मोहताज मोनिका ने अफसरों की चौखट पर गुहार लगाई, लेकिन मायूसी ही मिली.

डाक्टरों ने नहीं की सीधे मुंह बात

टीकरी की पट्टी भुजाना निवासी 24 वर्षीय मोनिका जन्म से दोनों हाथ और दोनों पैरों से दिव्यांग हैं. चारपाई पर हैं. भाई विपिन के साथ मिनी ट्रक में गद्दा बिछाकर लेटकर विकास भवन में फरियाद लेकर पहुंचीं. मोनिका ने कहा कि दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बनने से आज तक उन्हें दिव्यांग पेंशन या अन्य योजना का लाभ आज तक नहीं मिला. छह साल से दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने को कई बार स्वजन के साथ वाहन में लेटकर जिला अस्पताल पहुंची, लेकिन दिव्यांग प्रमाणपत्र बनना तो दूर डाक्टरों ने सीधे मुंह बात तक नहीं की.

बेबस पर तरस नहीं खाते अफसर

विकास भवन पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया, लेकिन दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर नहीं दिया. मायूस होकर मोनिका बोलीं कि कैसे अफसर हैं जो बेबस पर तरस नहीं खाते. दिव्यांग प्रमाणपत्र बन जाता तो पेंशन मिलने लगतीं, कुछ तो सहारा लगता. उनके भाई विपिन बताते हैं कि बहन का दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने में अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे.

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