अब, नीतीश कुमार ने पेगासस जासूसी मामले की जांच करने की कि मांग

आपको बता दें कि पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसे तेल-अवीव स्थित एक फर्म 'एनएसओ ग्रुप' द्वारा बनाया गया था, जिसे वर्ष 2010 में स्थापित किया गया था।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रमुख सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेगौस जासूसी विवाद की जांच की मांग की है, जिसने मानसून सत्र के दौरान संसद को लगभग ठप कर दिया है। संवाददाताओं से बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा कि संसद में पेगासस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, साथ ही साथ उन्होंने कहा कि इस पर जांच होनी चाहिए।

नीतीश ने कहा, वास्तव में जांच होनी चाहिए। हम इतने दिनों से टेलीफोन टैपिंग के बारे में सुन रहे हैं, इस मामले पर (संसद में) चर्चा होनी चाहिए। मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद से विपक्षी दल पेगासस विवाद, कृषि कानून, कोविड संकट पर दबाव बना रहे हैं। विपक्ष के हंगामे के बीच ऊपरी सदन में चार बिल पास हो गए।

आखिर क्या है पेगासस 

आपको बता दें कि पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसे तेल-अवीव स्थित एक फर्म ‘एनएसओ ग्रुप’ द्वारा बनाया गया था, जिसे वर्ष 2010 में स्थापित किया गया था। जिसमें एनएसओ अपने संस्थापकों-निव कारमी, शैलेव हुलियो और ओमरी लवी के आद्याक्षर बनाता है। एक वैश्विक एनजीओ के अनुसार, फर्म की स्थापना एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए की गई थी जो कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को डिजिटल एन्क्रिप्शन को दरकिनार करते हुए दूरस्थ डिजिटल उपकरणों तक पहुंचने में सहायता कर सके। हालांकि, समूह का उल्लेख है कि उत्पाद सरकारी एजेंसियों द्वारा अपराध और आतंक का मुकाबला करने के लिए विशेष उपयोग के लिए है। ‘सिटीजन लैब’ की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, स्पाइवेयर का कथित तौर पर भारत, बहरीन, कजाकिस्तान, मैक्सिको, मोरक्को, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित 45 देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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