…अब वह पुजारिन है कभी आंखें निकाल लेती थी

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लखनऊ। कानपुर जेल के मंदिर की पुजारिन कुसुमा नाइन की ईश्वर के प्रति तल्लीनता देखकर आप यह कतई नहीं सोच पाएंगे कि वह कभी कुख्यात डकैत थी। कभी बीहड़ों में जिसकी धाक थी…वह जिंदा लोगों की आंखे तक निकाल लेती थी। अब वही कुसुमा दूसरों की आंखों में ईश्वर के प्रति भक्ति देखना चाहती है। वह अनपढ़ है लेकिन दूसरे बंदियों से वह बारी-बारी से रमायण और गीता पढ़वाती है। सुनती है और फिर इन धर्मग्रंथों में लिखी बातों का अनुसरण करती है। सिर्फ इतना ही नहीं उसके जीवन में आए बदलाव का ही नतीजा आज वह कोई भी व्रत नहीं छोड़ती।

जेल अधीक्षक विजय विक्रम भी कुसुमा में बदलाव से बेहद भौचक्के हैं। डकैत में इस हद तक का परिवर्तन। उम्रदराज हो चुकी कुसुमा की दिनचर्या बाकी बंदियों के लिए भी हैरत कर देने वाली है। कुसुमा का यह मानना है कि ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ाकर वह अपने पापों को कम करना चाहती है।

राम- राम लिखना भी सीख लिया है उसने

कुसुमा नाइन ने बंदियों की मदद से राम लिखना भी सीख लिया है। जब भी खाली होती है तो वह कॉपी में राम-राम लिखने लगती है। रामायण और गीता तो बंदियों से सुबह-शाम सुनना उसकी दिनचर्या में शामिल हो गया है। ईश्वर के प्रति बढ़ी भक्ति अब उसे अहसास कराती है कि उसने जो किया वह गलत था। कू्रर था। उन पापों का अब वह इस तरह से प्रायश्चित कर रही है।

कुख्यात डकैत थी कुसुमा

कुसुमा नाइन कभी बेहद कुख्यात रही है। वह जिंदा लोगों की आंखे तक निकाल लेती थी। जेल अधीक्षक विजय विक्रम सिंह बताते है कि उसका ज्यादातर टाइम पूजा-पाठ और व्रत रहने में ही कटता है। कभी डकैतों के गुरु के नाम से मशहूर रामआसरे तिवारी उर्फ फक्कड़ बाबा भी जिला जेल में बंद हैं। जेल में अब उसकी पहचान आदर्श बंदी के रूप में बन चुकी है। इसके लिए जेल प्रशासन उसे कई बार सम्मानित भी कर चुका है।

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