अब खराब चिकित्सा उपकरण पर तुरंत नपेंगी कंपनियां, नया आदेश पहली अप्रैल से होगा प्रभावी

केंद्र सरकार ने मानव और जानवरों के काम आने वाले सभी तरह के चिकित्सा उपकरणों को औषधि घोषित कर दिया है। चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया यह फैसला एक अप्रैल, 2020 से प्रभावी होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा तीन के खंड (ब) के उप-खंड (चार) के तहत सभी तरह के चिकित्सा उपकरणों को मंगलवार को औषधि के रूप में अधिसूचित किया।

इनमें प्रत्यारोपित किए जाने वाले सभी उपकरण, सीटी स्कैन, एमआरआइ उपकरण, डेफिब्रिलेटर, डायलिसिस मशीन, पीईटी उपकरण, एक्स-रे मशीन और अस्थि मज्जा सेल विभाजक (बोन मैरो सेल सेपरेटर) शामिल हैं। इसका मकसद चिकित्सा उपकरणों को विनियमित करना है, जिससे कि वो गुणवत्ता के कुछ मानकों पर खरा उतरें। इसके अलावा खराब और असुरक्षित उपकरणों के लिए उनका उत्पादन करने वाली कंपनियों को जवाबदेह बनाना भी है।

इस कानून के प्रभाव में आने के बाद सभी तरह के चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन, आयात और बिक्री को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा प्रमाणित कराने की आवश्यकता होगी। अभी सिर्फ 23 तरह के चिकित्सा उपकरण ही इस कानून के तहत आते हैं। औषधि और चिकित्सा उपकरणों के तकनीकी पहलुओं पर सलाह देने के लिए गठित देश की शीर्ष परामर्श संस्था औषधि तकनीक सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) ने अप्रैल, 2019 में ही सभी चिकित्सा उपकरणों को इस कानून के दायरे में लाने की सिफारिश की थी।

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