अब ये 16 पार्टियां बचाएंगी राहुल गांधी की इज्ज़त? मिशन ‘300’ के लिए इनका सहारा है ज़रुरी

नई दिल्ली। कांग्रेस की कमान संभाले राहुल गांधी को सात महीने पूरे हो चुके हैं। पार्टी के सर्वेसर्वा बनने के बाद यह पहली बार है, जब उनकी अध्यक्षता में पहली बार सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई। कहा जाता है कि पार्टी में सीडब्ल्यूसी सबसे ताकतवर कमेटी और इस कमेटी हमेशा राहुल गांधी का ही बोलबाला रहा है। बताया जा रहा है हाल ही में हुई इस बैठक में पार्टी ने 300 सीटें जीतने का पूरा लक्ष्य तय कर लिया है।

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 300 सीटों के साथ-साथ समान विचारधाराओं वाले सभी दलों से गठबंधन का फैसला भी लिया है। बैठक में रणनीति बनाते हुए ये तय किया गया कि देखा जाए तो 12 राज्यों में मजबूत संगठन के साथ भी केवल 150 सीटों पर ही पार्टी का कब्ज़ा है, लेकिन अगर पार्टी को इससे ज्यादा सीटें चाहिए तो सहयोगी दलों का सहारा भी लेना पड़ेगा। साथ ही पार्टी को अलग-अलग राज्यों में पार्टी को कई क्षेत्रीय दलों से गठबंधन भी करना होगा। अगर एक नज़र 2014 के परिणामों पर डाली जाए तो 280 सीटों पर बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने जीत दर्ज की थी।

 

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में चुनावी परिणामों में बडा़ उलटफेर हो सकता है। इसके लिए पार्टी को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, जिसके अंतर्गत कांग्रेस को कुछ नए गठबंधन करने पड़ेंगे। वहीं कुछ राज्यों में पहले से ही कांग्रेस के कुछ पुराने गठबंधन है।

बात करें उत्तर प्रदेश की तो वहां पार्टी गठबंधन के तीसरे दल के तौर पर रह सकती है। वहीं इस गठबंधन में शामिल होने वाली पार्टियों में सपा, बसपा, कांग्रेस ,रालोद शामिल हैं। पिछले नतीजो के मुताबिक बीजेपी को 39.7, सपा को 22, बसपा को 22.2 और कांग्रेस को 6.2 वहीं रालोद को 1.8 फीसदी वोट मिले थे।

झारखंड में कांग्रेस, राजद और झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठबंधन रहा है। आनेवाले समय में इसमें पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम भी शामिल हो सकती है। इस साल के अंत तक विधान सभा चुनाव होने वाले राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी सहयोगी दलों से गठबंधन पर कांग्रेस जोर-शोर से मंथन कर रही है। इन सभी बातों पर गौर करते हुए कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस बसपा के अलावा सपा और जीजीपी भी आपस में गठबंधन को करने को तैयार है, वहीं छत्तीसगढ़ अभी तक केवल समझौता करने के ही आसार नज़र आ रहे हैं।

वहीं राजस्थान में कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने पहले ही आगाह कर दिया कि वह किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेंगे, लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वह आगामी समय में बसपा से गठबंधन करने को तैयार है। कर्नाटक में भी पार्टी ने जेडीएस और बसपा से लोकसभा चुनाव में गठबंधन करने का मन बना लिया है।

वहीं महाराष्ट्र में कांग्रेस पूर्व सहयोगी शरद पवार की एनसीपी के साथ भी गठबंधन करने का मन बना रही है। पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन करने की रणनीति बनाई है। गुजरात विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस वहां अब एनसीपी, बसपा और भारतीय ट्राइबल पार्टी को भी साथ कर सकती है।

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