ओम प्रकाश: झपकती आंखें, लड़खड़ाती आवाज, फिर भी किया दर्शकों के दिल पर राज

बॉलीवुड में अपनी दमदार एक्टिंग से सभी का मन मोह लेने वाले ओम प्रकाश का निधन आज ही के दिन हुआ था. आप सभी को बता दें कि ओम प्रकाश ने 21 फरवरी 1998 को लीलावती अस्पताल में अंतिम सांस ली थी. उनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है. साल 1993 में ओम प्रकाश एक्टर बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे, लेकिन शुरुआत में कोई काम नहीं मिला तो सरोज कंपनी में तीस रुपये महीने पर काम करने लगे. कहा जाता है फिल्मों में सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने साल 1937 में ऑल इंडिया रेडियो ज्वॉइन किया था और वह रेडियो पर ‘फतेह दिन’ नाम की पर्सनैलिटी के तौर पर अपने प्रोग्राम पंजाब में सुनाया करते थे.

आप सभी को बता दें कि नौकरी के बावजूद ओम प्रकाश ने अपने एक्टर बनने के सपने को जिंदा रखा और मुंबई की रोजाना काली रातों में वो अपने सपने को लेकर सोते थे, लेकिन कभी अपने सपने को सोने नहीं दिया. वहीं उसके बाद उनकी किस्मत चमकी और साल 1950 में फिल्म ‘दासी’ में उन्हें पहला रोल मिल गया. इस फिल्म में काम करने के लिए ओम प्रकास को सिर्फ 80 रुपए मिले थे और यह फिल्म रिलीज हुई और ओम प्रकाश की एक्टिंग की चर्चा हर तरफ होना शुरू हो गई.

उसके बाद उन्हें लगातार काम मिलने लगे और ‘नमक हलाल’ फिल्म में ओमप्रकाश के किरदार को सबसे यादगार बन गया. इस फिल्म को प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनाया गया था और फिल्म साल 1982 में रिलीज हुई. इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के दादा दशरथ सिंह का रोल निभाया था. आप सभी को बता दें कि ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर 1919 को पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था और उन्होंने 78 साल की उम्र में मौत को गले लगा लिया था.

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