ओमप्रकाश को अवमानना मामले में नोटिस किया जारी, अवैध धार्मिक संरचनाओं को हटाये जाने का मामला

अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने बताया कि मामले को सुनने के बाद अदालत ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में सुनवाई चार सप्ताह बाद हो सकेगी।

नैनीताल: उत्तराखंड में सार्वजनिक स्थलों पर अवैध धार्मिक संरचनाओं (ढांचों) को हटाये जाने के मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं करने के मामले में उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्रदेश के मुख्य सचिव ओमप्रकाश को नोटिस जारी किया।

समय पर नहीं हुआदेश का अनुपालन

न्यायमूर्ति शरत कुमार शर्मा की अदालत की ओर से यह नोटिस अधिवक्ता विवेक शुक्ला की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद जारी किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि उच्चतम न्यायालय ने 29 सितम्बर, 2009 को आदेश जारी कर सभी राज्य सरकारों को सार्वजनिक स्थलों में निर्मित्त अवैध धार्मिक ढांचों (मंदिर-मस्जिद-गुरूद्वारों) को हटाये जाने के आदेश जारी किये थे। इन ढांचों (संरचनाओं) को हटाये जाने की जिम्मेदारी प्रदेश के मुख्य सचिवों को सौंपी गयी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि न्यायालय की ओर से भी इसी साल आदेश जारी कर सार्वजनिक स्थलों से ऐसे सभी ढांचों व निर्माणों को 23 मार्च तक हटाये जाने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिये गये थे लेकिन प्रदेश सरकार उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं कर पायी है।

नहीं हटाई जा सकी अवैध धार्मिक संरचनायें

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया है कि सरकार की ओर से ऐसे धार्मिक स्थलों के मामले में कोई नीति नहीं बनायी गयी है। सरकार आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे निर्माणों को नहीं हटा रही है। अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने बताया कि मामले को सुनने के बाद अदालत ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में सुनवाई चार सप्ताह बाद हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि इसी मामले में उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका लंबित है। सरकार की ओर से हाल ही में शपथ पत्र पेश करके कहा गया कि सभी जिलों से सार्वजनिक स्थलों पर 2009 के बाद निर्मित सभी अवैध धार्मिक ढांचों को हटा लिया गया है। हरिद्वार जनपद में सिंचाई विभाग की भूमि पर निर्मित चार संरचनाओं को नहीं हटाया जा सका है।

सरकार की ओर से महाकुंभ का हवाला देते हुए इन्हें हटाने के लियेे मई तक का समय मांगा गया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि ऊधमसिंह नगर में भी एक धार्मिक ढांचे को अदालत में वाद लंबित होने के चलते नहीं हटाया जा सका है।

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