एक मैच और जीतने पर ,विराट रच देंगे ऑस्ट्रेलिया में इतिहास

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भारतीय क्रिकेट टीम शुक्रवार को तीसरे और आखिरी वनडे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरेगी, तो उसका इरादा टेस्ट सीरीज के बाद सीमित ओवरों में भी ऐतिहासिक पहली जीत दर्ज करने का होगा. तीन मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है. ऑस्ट्रेलिया ने सिडनी में पहला वनडे 34 रनों से और भारत ने एडिलेड में दूसरा मैच छह विकेट से जीता.

भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर कभी द्विपक्षीय वनडे सीरीज नहीं जीती है. इस प्रारूप में उसने ऑस्ट्रेलिया में 1985 में विश्व चैम्पियनशिप ओर 2008 में सीबी सीरीज जीती थी. पिछली बार भारत को 2016 में ऑस्ट्रेलिया ने यहां वनडे सीरीज में 4-1 से हराया था.

मेलबर्न में भारत अगर तीसरा वनडे जीत लेता है, तो 2018-19 के दौरे पर कोई भी सीरीज गंवाए बिना टीम लौटेगी. टी-20 सीरीज 1-1 से बराबर रही, जबकि टेस्ट सीरीज में 2-1 से ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

भारत की एकमात्र चिंता पांचवें गेंदबाजी विकल्प की होगी. सीरीज में अब तक तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी प्रभावी रहे हैं, जबकि स्पिनर कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा ने बीच के ओवरों में मोर्चा संभाला है. हार्दिक पंड्या की गैर मौजूदगी में भारत ने सिडनी और एडिलेड में पांचवें विकल्प के रूप में तेज गेंदबाजों खलील अहमद और मोहम्मद सिराज को आजमाया जिन्होंने क्रमश: 55 और 76 रन दे डाले.

पांचवें गेंदबाज के रूप में हरफनमौला विजय शंकर और लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल विकल्प हो सकते हैं. दोनों ने एमसीजी पर जमकर अभ्यास किया.
शंकर एक अतिरिक्त बल्लेबाज की कमी भी पूरी करेंगे, लेकिन देखना यह है कि वनडे क्रिकेट में पदार्पण के साथ क्या टीम प्रबंधन उन्हें पूरे 10 ओवर देने का भरोसा कर सकता है. सिराज इसमें नाकाम रहे और कप्तान विराट कोहली असमंजस में थे कि उससे स्पेल के आखिरी तीन ओवर कराए जाएं या नहीं. भारत अगर दो तेज गेंदबाजों और तीन स्पिनरों को लेकर उतरता है, तो चहल विकल्प हो सकते हैं.

शंकर के खेलने से बल्लेबाजी क्रम में बदलाव होगा और केदार जाधव के लिए जगह बन सकती है. ऐसे में पांचवें गेंदबाज के दस ओवर जाधव और शंकर मिलकर कर सकते हैं. तब अंबति रायडू या दिनेश कार्तिक को बाहर रहना होगा. कार्तिक ने दूसरे वनडे में अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि रायडू प्रभावित नहीं कर सके हैं.

 

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