शबनम फांसी मामले पर महंत ने कहा- महिला को दी फांसी तो आएंगी आपदाएं

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी में अप्रैल 2008 में प्रेमी से शादी करने के लिए अपने माता-पिता सहित परिवार के सात लोगो की हत्या करने वाली शबनम (Shabnam) की फांसी रोकने के लिए पहली मांग अयोध्‍या से उठी है। अयोध्या के तपस्‍वी छावनी के महंत परमहंस दास ने शबनम (Shabnam) की फांसी टालने के लिए राष्‍ट्रपति से अपील की है। महंत ने कहा कि आज तक आजाद भारत में किसी महिला को फांसी नहीं दी गई। अगर शबनम को फांसी दी जाती है तो यह पहला मामला होगा इसलिए इस फांसी की सजा को माफ कर दें। इस देश में अगर महिला को फांसी दी गई तो देश को दुर्भाग्‍य और आपदाओं का सामना करना पड़ेगा।

महंत परमहंस दास का कहना है कि हिंदू शास्‍त्रों में नारी का स्थान पुरुष से बहुत ऊपर माना जाता है। इसलिए भारत देश की नारी को मृत्‍युदंड देना गलत होगा ये कोई समाज की भलाई का काम नहीं है। अगर इस महिला या किसी को भी फांसी की सजा दी जाती है तो इससे दुर्भाग्‍य और आपदाओं को न्‍यौता मिलेगा। इसके आगे उन्होंने कहा कि इस महिला ने जो अपराध किया है वो माफ़ करने के लायक नहीं है लेकिन इसके उसे फांसी नहीं होनी चाहिए।

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राष्‍ट्रपति से की अपील

इसके आगे उन्होंने कहा कि ‘मैं हिंदू धर्मगुरु होने के नाते आज राष्‍ट्रपति से अपील करता हूं कि शबनम की याचिका को स्वीकार करके माफी दे, वप अपने इस अपराध के लिए जेल में प्रायश्चित कर चुकी है। अगर उसे फांसी दी जाती है तो इस देश के इतिहास का यह सबसे दुर्भाग्‍यपूर्ण अध्‍याय होगा। महंत ने कहा कि देश का संविधान राष्‍ट्रपति को असाधारण शक्तियां देता है। इन शक्तियों का इस्‍तेमाल क्षमा देने में करना चाहिए।’

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