इतिहास (History) का महत्वपूर्ण दिन, आज ही के दिन लाल बहादुर शास्त्री की हुई थी रहस्यमयी मौत

आज इतिहास का बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन है। आज के ही दिन ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देने वाले महान व्यक्ति का निधन हुआ था।

नई दिल्ली: आज इतिहास का बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन है। आज के ही दिन ‘जय जवान जय किसान’ का नारा देने वाले महान व्यक्ति का निधन हुआ था। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का आज ही के दिन 1966 में उज्बेकिस्तान के ताशकंद में निधन हो गया था।

पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को शास्त्री प्रधानमंत्री बने थे। वो करीब 18 महीने तक प्रधानमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में ही भारत ने 1965 की जंग में पाकिस्तान को शिकस्त दी थी। इसके बाद वो पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ताशकंद गए थे और वहीं उनकी मौत हो गई।

एक फूल तोड़ने की सजा..

चार साल की उम्र में पिता ने जिसका हाथ छोड़ दिया था। दो त़ड़ाके की थपड़ ने जिसकी सोच बदल दी थी। एक गुलाब का फूल तोड़ने पर जब शस्त्री में बताया की मेरे पिता नहीं हैं तो सोचा माली दया दिखा कर मुझे नहीं मारेगा लेकिन माली ने दो थपड़ लगाया और उन्होंने कहा था, “जब तुम्हारा बाप नहीं है, तब तो तुम्हें ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए। और सावधान रहना चाहिए। तुम्हें तो नेकचलन और ईमानदार बनना चाहिए।” लाल बहादुर शास्त्री के मन में उस दिन यह बात बैठ गई कि जिनके पिता नहीं होते, उन्हें सावधान रहना चाहिए। ऐसे निरीह बच्चों को किसी और से प्यांर की आशा नहीं रखनी चाहिए। उसी दिन के बाद से उनकी सोच बदल गई। और उन्होंने अपना जीवन देश के नाम कर दिया।

अभी तक रहस्य बनी है शास्त्री की मौत

लाल बहादुर शास्त्री की मौत का रहस्य आज भी बना हुआ है। 10 जनवरी 1966 को पाकिस्तान के साथ ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के महज 12 घंटे बाद 11 जनवरी को तड़के 1 बजकर 32 मिनट पर उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि शास्त्री मृत्यु से आधे घंटे पहले तक बिल्कुल ठीक थे, लेकिन 15 से 20 मिनट में उनकी तबियत खराब हो गई।

इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें एंट्रा-मस्कुलर इंजेक्शन दिया। इंजेक्शन देने के चंद मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई। शास्त्री की मौत पर संदेह इसलिए भी किया जाता है, क्योंकि उनका पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया था। उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने दावा किया था कि उनके पति को जहर देकर मारा गया। उनके बेटे सुनील का भी कहना था कि उनके पिता की बॉडी पर नीले निशान थे।

जब शास्त्री के शव को दिल्ली लाने के लिए ताशकंद एयरपोर्ट पर ले जाया जा रहा था तो रास्ते में सोवियत संघ, भारत और पाकिस्तान के झंडे झुके हुए थे। शास्त्री के ताबूत को कंधा देने वालों में सोवियत प्रधानमंत्री कोसिगिन और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान भी थे।

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