एक फोन कॉल… और आ गई मोदी-ओबामा के बीच दरार!

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वाशिंगटन। देश में जब से मोदी की सरकार बनी है तभी से भारत और अमेरिका की दोस्‍ती के कसीदे पढ़े जा रहे हैं। या यूं कहें कि‍ मोदी और ओबामा की दोस्‍ती के कसीदे पढ़े जा रहे हैं। पिछले दिनों ये दोनों लगभग 10 से भी ज्‍यादा बार एक दूसरे से मुलाकात कर चुके हैं और न जाने कितनी बार फोन पर बातचीत। लेकिन इसी बीच अब लगता है कि इन दोनों की दोस्‍ती में सबकुछ ठीक नहीं रहा।

दरअसल बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में मोदी ने एच-1 बी और एल-1 वीजा की फीस को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। लेकिन भारत की चिंताओं को खारिज करते हुए अमेरिका ने एच-1बी और एल-1 वीजा के लिए फीस दोगुनी बढ़ा दी है। इसके लिए अब 4500 डॉलर तक खर्च करने पडे़ंगे। अमेरिकी कांग्रेस के इस कदम से भारतीय आईटी कंपनियों पर असर पड़ेगा।

अमेरिका ने 9/11 हेल्थकेयर एक्ट और बायोमेट्रिक ट्रैकिंग सिस्टम के लिए धन उपलब्ध कराने के मकसद से फीस बढ़ाने की बात कही है। अब एच-1बी वीजा के कुछ वर्ग के लिए फीस 4000 डॉलर जबकि एल-1 वीजा के लिए 4500 डॉलर देने होंगे।

वीजा फीस बढ़ाने से अमेरिका को हर साल एक अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। इस राशि को अमेरिका में प्रवेश और बाहर जाने के लिए बयोमेट्रिक सिस्टम बनाने पर खर्च किया जाएगा।

इस बारे में पास विधेयक के मुताबिक 4000 डॉलर की राशि उन कंपनियों से वसूली जाएगी जिनके पास कम से कम 50 कर्मचारी हों और उनमें से 50 फीसदी के पास एच-1बी या एल-1 वीजा हो। इन कंपनियों को एच-1बी के लिए 4000 डॉलर और एल-1 के लिए 4500 डॉलर देने होंगे।

इस विधेयक में विशेषतौर पर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों का जिक्र नहीं है लेकिन इससे उन पर व्यापक असर पड़ेगा। इससे पहले वर्ष 2010 से 2015 के बीच अमेरिका में एच-1बी वीजा के लिए शुल्क 2000 डॉलर था, जिसकी मियाद 30 सितंबर को समाप्त हो गई।

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