किताब लेकर परीक्षा दे सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यार्थी

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लखनऊ। यूपी बोर्ड के विद्यार्थी आने वाले सेशन से जब एग्जाम देंगे तो संबंधित विषय की किताब भी लेकर बैठ सकेंगे। प्रदेश सरकार यह व्यवस्था अगले सत्र से लागू कर सकती है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं को नकल माफियाओं के चंगुल से बचाने के लिए सपुस्तक प्रणाली (ओपन बुक सिस्टम) लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इस सिस्टम को अच्छी तरह से जांचा-परखा जा रहा है जिससे इसके लागू होने के बाद किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े

जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यूपी की बोर्ड परीक्षाओं में बढ़ती नकल से चिंतित हैं। इसलिए विभागीय मंत्री बलराम यादव व आला अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में उन्होंने इस प्रणाली को लागू करने पर चर्चा की। ओपन बुक सिस्टम यूरोप में काफी लोकप्रिय है। इस प्रणाली में विद्यार्थी परीक्षा के समय अपनी किताबें, रिफरेंस सामग्री, नोट्स आदि रख सकता है। यूपी बोर्ड में 25 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी हर वर्ष परीक्षा देते हैं लेकिन परीक्षा की शुचिता न के बराबर है। यहां से परीक्षा पास करने के लिए आसपास के राज्यों से भी विद्यार्थी आते हैं। हालांकि इस विचार के चर्चा में आते ही विभाग में दो मत हो गए हैं। ज्यादातर ने इसका विरोध अभी से शुरू कर दिया है। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता आरपी मिश्र कहते हैं कि यूपी बोर्ड के स्कूलों के शैक्षणिक स्तर ऊंचा करने के बजाय सपुस्तक प्रणाली लागू करने का विचार एकदम खारिज करने योग्य है। सपुस्तक प्रणाली से नकल भले रुक जाए लेकिन विद्यार्थियों को कोई फायदा नहीं होने वाला।

1989 में भी थी किताब के साथ परीक्षा की व्यवस्था

1989 में यूपी बोर्ड इस प्रणाली को लागू कर चुका है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने इसे लागू किया था। उस वर्ष सभी घरेलू और बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों ने किताबों के साथ परीक्षा दी लेकिन इस परीक्षा मे फेल होने वाले विद्यार्थियों प्रतिशत बढ़ा। इसका कारण यह था कि विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष किताब ही नहीं खोली नतीजतन परीक्षा के समय वो उत्तर ढू़ंढ़ भी नहीं पाए।

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