कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण में खुली विपक्ष की एकता की पोल, कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर भी भरोसा नहीं

नई दिल्ली: भले ही कर्नाटक में कुमारस्वामी द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सूबे में मची राजनीतिक उठापटक ख़त्म हो गई हो, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की इस सरकार ने एकजुट दिखाई दे रही विपक्ष की एकता की पोल खोलकर रख दी है। दरअसल, विपक्ष के कुछ राजनीतिक दल अभी भी इस बात को लेकर असमंजस में फंसे नजर आ रहे हैं कि कर्नाटक में बनी कांग्रेस-जेडीएस सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाएगी।

यह जानकारी न्यूज चैनल indiatv के  उस वीडियो से प्राप्त हुई है, जो कुमारस्वामी के शपथ लेने के ठीक बाद सामने आई है। इस वीडियो में विपक्ष के कई दिग्गज नेता नजर आ रहे हैं, जो आपस में चर्चा कर रहे हैं कि आखिर यह सरकार कितने दिन तक सत्ता पर विराजमान रहेगी। वीडियो में नजर आ रहे नेताओं में सीताराम येचुरी, चन्द्रबाबू नायडू, डी राजा और अरविन्द केजरीवाल का नाम प्रमुख है।

इस वीडियो के बारे में बताया जा रहा है कि यह उस वक्त कैमरे में कैद किया गया जब कर्नाटक के सीएम के शपथ ग्रहण समारोह की कुर्सियां हटाई भी नहीं गई थी। इस शपथ ग्रहण को जहां विपक्ष की एकता के रूप में देखा जा रहा था। वहीं वीडियो ने इस एकता की जमीनी हकीकत को बयां कर दिया है।

इसके अलावा इस वीडियो ने बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस की उस चाल पर भी कुठाराघात किया है जिसके बल पर कांग्रेस ने जेडीएस की सहायता से बीजेपी को सत्ता से दूर रखा। वीडियो में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, लेफ्ट के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी और डी राजा हैं। वैसे इस बैठक में मायावती और ममता बनर्जी भी थीं लेकिन वीडियो में दोनों नजर नहीं आ रहीं हैं। आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू भी हैं और ये सब चर्चा कर रहे हैं क्या मोदी के सामने कोई विकल्प खड़ा हो पाएगा लेकिन चर्चा के बीच में ही सवाल सामने आता है क्या कुमारस्वामी पांच साल सरकार चला पाएंगे।

इस वीडियो के सामने आने के बाद यह साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि कांग्रेस जिस विपक्ष को एकजुट कर अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने का प्रयास कर रही है। वह विपक्ष आपस में ही एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर रही। विपक्ष को कांग्रेस-जेडीएस सरकार को ही भरोसा नहीं है। यह भी साफ़ हो गया है कि कर्नाटक की नवनिर्वाचित सरकार के कार्यकाल के दौरान अगर किसी मुद्दे पर कांग्रेस और जेडीएस के आपसी संबंधों में कोई मनमुटाव सामने आया तो यह सरकार तो बिखर ही सकती है। साथ ही विपक्षी वोटबैंक पर ही खासा प्रभाव पड़ेगा।

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