यूपी की राजनीति में मची खलबली, मायावती बोलीं- बीजेपी को रोकने के लिए सपा-बसपा गठबंधन

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लखनऊ। विगत दिनों संपन्न हुए यूपी उपचुनावों में एकसाथ आने पर मिली जीत से सपा-बसपा दोनों ही उत्साहित हैं। राजनीतिक गलियारों में इन दिनों मायावती और अखिलेश यादव के हाथ मिलाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी मुद्दे को थोड़ी और हवा देते हुए आज बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग रखी है।
इस बैठक का उद्देश्य गठबंधन के मुद्दे पर पार्टी नेताओं की राय जानना बताया जा रहा है। मीटिंग से पहले मायावती ने मीडिया को बयान देते हुए कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए सपा-बसपा का महागंठन है। इसमे किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं है।

राज्यसभा चुनाव के बाद लगाए जा रहे थे दोनों पार्टियों के बीच रिश्तों में दरार के कयास
हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर को हार का सामना करना पड़ा था। जिसके चलते दोनों पार्टियों के बीच संबंधों को लेकर दरार पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। मगर मायावती ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि इस चुनाव में हार के बावजूद उनके व सपा के रिश्तों पर कोई आंच नहीं आएगी।

बैठक से पहले मायावती ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि साढ़े चार साल की सरकार के दौरान बीजेपी ने सिर्फ ड्रामा किया है, खासकर दलितों को लेकर। मोदीजी ने मन की बात में बीआर आंबेडकर के लिए बोला था लेकिन उनकी मानसिकता बाबा साहेब के बिल्कुल विपरीत है, जिसके खिलाफ वे खड़े हुए थे। यही वजह है कि बीजेपी-आरएसएस पिछले कई दशकों तक सत्ता से बाहर रही थी। उन्होंने आगे कहा कि वे लोग अंबेडकर का नाम जपते हैं लेकिन उस कैटिगरी से जो आते हैं उन पर अत्याचार करते हैं।

इससे पहले राज्यसभा चुनावों में बीएसपी के प्रत्याशी की हार पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बयान देते हुए कहा था कि इस चुनाव से बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के रिश्तो में कोई अंतर नही आयेगा, बल्कि दोनों पार्टियों के लोग मिलकर आने वाले चुनाव में पूरी ताकत झोंक देंगे। कांग्रेस पुरानी सहयोगी हैं।

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