अखिलेश के प्लान पर ओवैसी की नजर, बना रहे ये रणनीति

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए अपना एक अलग गठबंधन बनाने का प्लान तैयार किया गया है.

सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए अपना एक अलग गठबंधन बनाने जा रही है. इस मोर्चे में पांच दल शामिल होंगे और इसकी घोषणा आगामी 12 दिसंबर को कानपुर में होने वाले वंचित शोषित सम्मेलन में की जाएगी. 12 दिसंबर को कानपुर के बाद, 18 दिसंबर को मेरठ, 19 दिसंबर को बिजनौर के नगीना, 25 दिसंबर को फिरोजाबाद और पहली जनवरी को सहारनपुर में भी ऐसे सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे. इससे पहले विधान सभा चुनाव की तैयारियों के तहत औवैसी सुल्तानपुर, उतरौला, रूदौली, बाराबंकी, जौनपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और सम्भल में वंचित शोषित सम्मेलन को संबोधित कर चुके हैं.

ओवैसी से निपटने के लिए सपा तैयार

बता दें कि बीजेपी ने 2017 के चुनाव में बूथ मैनेजमेंट और छोटे दलों से गठबंधन के साथ-साथ टिकट बंटवारे में जातिय समीकरणों का भी ख्याल रखा था. इसका उसे फायदा भी हुआ था. बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. इससे सबक लेकर सपा ने इस बार बड़े दलों को छोड़ छोटे-छोटे दलों को साथ चुनाव में जाने का फैसला किया है. उसका सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, महान दल, जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) और अपना दल (कमेरावादी) से गठबंधन हो चुका है. माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी से सपा की बाचचीत जारी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बताया कि 2014, 2017 और 2019 की परिस्थितियां अलग थीं और 2022 के हालात अलग हैं. उन्होंने दावा किया कि इस बार प्रदेश की जनता बीजेपी का सफाया कर देगी.

यादव और मुसलमान सपा का मजबूत वोट बैंक

यादव और मुसलमानों को समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत वोट बैंक माना जाता है. लेकिन 2017 से ही एमआईएम सपा के मुसलमान वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. पिछला चुनाव उसने 30 से अधिक सीटों पर लड़ा था. इस बार उसने 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. इस वजह से सपा को बीजेपी से निपटने के साथ-साथ एमआईएम से भी निपटने की रणनीति बनानी पड़ रही है. अखिलेश यादव का दावा है कि उत्तर प्रदेश में किसान, नौजवान और व्यापारी समेत प्रदेश की जनता इस बार उनके साथ है. वहीं उनके भाई धर्मेंद्र यादव का भी कहना था कि जाति, धर्म और वर्ग की सीमा से अलग हटकर इस बार समाज के सभी तबके का समर्थन सपा को मिलेगा. इसके समर्थन में धर्मेंद्र अखिलेश यादव सरकार की उपलब्धियां गिनाते हैं. उनका दावा है कि 2022 में किसान, युवा, व्यापारी, महिला, दलित और ओबीसी समेत समाज का हर तबका सपा को वोट देगा.

 

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