पिछले साल के मुकाबले इस बार ढाई फीसदी बढ़ा धान का रकबा

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नई दिल्ली: खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले इस साल बढ़ गया है। हालांकि दलहन, मोटा अनाज और नकदी फसल कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम है। तिलहनों का रकबा पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब ढाई फीसदी ज्यादा है।

खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल से थोड़ा ही पिछड़ा हुआ है। केंद्रीय कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी फसल वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) के खरीफ सीजन के बुवाई के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, देशभर में खरीफ फसलों का रकबा 1,022.87 लाख हेक्टेयर है, जोकि पिछले साल की समान अवधि का रकबा 1027.87 लाख हेक्टेयर से महज 0.41 फीसदी कम है।

धान का रकबा 369.98 लाख हेक्टेयर हो गया है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के रकबे 367.88 लाख हेक्टेयर से 0.57 फीसदी ज्यादा है। खरीफ सीजन की सभी दलहन फसलों का रकबा 132.66 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है जबकि पिछले साल 136.12 लाख हेक्टेयर था। दलहनों का रकबा पिछले साल के मुकाबले 2.55 फीसदी कम है।

मोटे अनाज की बुवाई का रकबा 172.31 लाख हेक्टेयर है, जोकि पिछले साल का रकबा 179.21 लाख हेक्टेयर से 3.85 फीसदी पिछड़ा हुआ है।  सभी तिलहनों का रकबा पिछले साल के मुकाबले 2.51 फीसदी बढ़कर 171.30 लाख हेक्टेयर हो गया है।

गाओं  का रकबा पिछले साल के 49.86 लाख हेक्टेयर से 4.17 फीसदी बढ़कर 51.94 लाख हेक्टेयर हो गया है। जूट और मेस्ता का रकबा पिछले साल के मुकाबले 0.76 फीसदी घटकर 7.01लाख हेक्टेयर रह गया है।

कपास का कुल रकबा 117.66 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में दर्ज रकबा 119.88 लाख हेक्टेयर से 1.85 फीसदी कम है।

बीते हफ्ते 23-29 अगस्त के दौरान देशभर में औसत बारिश 49.9 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में बारिश का सामान्य औसत 53 मिलीमीटर रहती है। इस प्रकार पिछले हफ्ते देशभर में औसत से छह फीसदी कम बारिश हुई।

मानसून सीजन में एक जून से लेकर 29 अगस्त के दौरान औसत बारिश 655 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में बारिश का सामान्य औसत 700.3 मिलीमीटर रहती है। इस प्रकार, अगस्त के आखिर तक मानसून सीजन की बरसात औसत से छह फीसदी कम रही है।

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