25 किलो की गोभी, 6 फीट लम्बा घीया पैदा करने वाले किसान को मिलेगा पद्मश्री

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सुनते ही आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे कि 25 किलो की गोभी, सात फीट की तुरई, छह फीट लम्बी घीया, एक मीटर लम्बा बैंगन और तीन किलो का गोल बैंगन पैदा करने वाले किसान को इस साल भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार के लिए नामित किया है। सीकर जिले के अजीतगढ़ के रहने वाले नवाचारी किसान जगदीश पारीक आठ किलो की पत्ता गोभी, 86 किलो का कद्दू और एक मिर्ची के पेड़ पर 150 मिर्ची अपने खेतों में पैदा करते हैं।


उन्होंने  बताया कि 25 जनवरी की रात करीब ग्यारह बजे फोन आया कि आपको कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए पद्मश्री मिला है। इस पर एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ कि किसानी पर भी पद्मश्री मिल सकता है। नवाचारी किसान पारीक के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं, वर्ष 2001 में लिम्बा बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया।

दो एकड़ भूमि में चार सौ पेड़ अनार और नींबू के

पारीक ने बताया कि उसने खेती वर्ष 1957 में अपने मामाजी के साथ शुरू की थी, लेकिन वर्ष 1970 में स्वतंत्र रूप से खेती करने लगे। इसके तहत दो एकड़ खेत में चार सौ पेड़ अनार के और तीन सौ पेड़ नींबू के लगाए गए। उनके बीच-बीच में सब्जियों की खेती शुरू कर दी, जिसमें पूर्णतया जैविक को ही आधार बनाया गया। कीटनाशी भी स्वयं ही तैयार कर खेतों में डालते हैं, बिल्कुल भी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते हैं। खेती घाटे का सौदा, इस सोच को बदला जा सकता हैआमतौर पर यह मान लिया गया है कि खेती घाटे का सौदा है, लेकिन यदि उद्यानिकी और सब्जियों के साथ रबी-खरीफ की खेती करे तो उसका फायदा किसान को मिलता है।

आमतौर पर किसान रबी और खरीफ की फसल ही करता है, आवश्यकता इस बात की है कि उसे उद्यानिकी खेती के साथ ही सब्जियों पर भी फोकस करना चाहिए। उनका कहना है कि उनके चार पुत्र हैं, जो पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं। घर-परिवार के सभी काम खेती से ही होते हैं।

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