पद्मभूषण कवि नीरज ने डीएम को लिखा था पत्र, मांगी थी इच्छामृत्यु!

लखनऊ: पद्मभूषण से सम्मानित हिंदी के साहित्यकार, कवि, लेखक और गीतकार गोपाल दास ‘नीरज’ का रविवार को अलीगढ़ के प्रदर्शनी मैदान के पास स्थित श्मशानघाट घाट पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे इस दिग्गज कवि का गुरुवार (19 जुलाई) को दिल्ली के एम्ल में निधन हो गया था। वह अपनी बीमारी से इतने टूट चुके थे कि उन्होंने अलीगढ़ प्रशासन को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति भी मांगी थी। इस बावत उन्होंने 11 जुलाई को अलीगढ़ के जिलाधिकारी को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने ‘खुद को शरीर से मुक्त होने की इच्छा’ जताई थी।

डीएम को चिट्ठी लिख मांगी थी इच्छा मृत्यु की स्वीकृति

अलीगढ़ के जिलाधिकारी चंद्र भूषण ने कहा है कि उन्हें कवि नीरज से ऐसा पत्र मिला था। “11 जुलाई को भेजे गये इस पत्र को रजिस्टर्ज डाक से भेजा गया था, यह पत्र हमारे पास 16 जुलाई को पहुंचा था। उसी दिन नीरज जी आगरा चले गये थे। फिर भी सीएमओ को दिग्गज कवि का तत्काल इलाज करने का निर्देश दिया गया था।

बेटी ने कहा वह काफी खुशमिजाज व्यक्ति थे

कवि गोपाल दास नीरज की बेटी कुंडलिका शर्मा ने एक अखबार को बताया, “मुझे इसकी जानकारी तब मिली जब उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था। ये पता चला था कि उन्होंने अलीगढ़ के डीएम को एक पत्र लिखा था, ये काफी आश्चर्यजनक है, क्योंकि उन्हें एक खुशमिजाज व्यक्ति के तौर पर जाना जाता था, परिवार के सभी लोग उनकी सेवा करने के लिए तैयार रहते थे।”

पत्र में सुप्रीम कोर्ट के इच्छा मृत्यु  का किया था जिक्र

कवि नीरज ने इस पत्र में इच्छा मृत्यु के संबंध में हाल में दिये गये सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र किया है। खत में कवि नीरज ने लिखा था, ‘मुझे पता है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऐसे लोगों को इच्छा मृत्यु की मंजूरी दी है, जो शरीर के दर्द को सहन नहीं कर पा रहे हैं। मेरा स्वास्थ्य एवं शरीर अब इस योग्य नहीं है कि कुछ भी कर सके, इसलिए जो शरीर मेरे लिए अब बड़ा बोझ बन गया है उससे मुक्त होना चाहता हूं।” पत्र में कवि नीरज ने मृत्यु का वरण करने के लिए हेलीडेथ इंजेक्शन की मांग की थी।

राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

आपको बता दें कि पद्मभूषण, महाकवि गोपाल दास नीरज पंच तत्व में विलीन हो चुके हैं। शनिवार को महाकवि नीरज का पार्थिव शरीर दिल्ली से आगरा के रास्ते अलीगढ़ के जनकपुरी स्थित उनके आवास पर पहुंचा। सुबह करीबियों और प्रशंसकों का भारी हुजूम उनके आखिरी झलक को देखने के लिए उमड़ा। नीरज के चार पुत्रों और पौत्र ने संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी।

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