पाक सांसद का कबूलनामा, अल्पसंख्यकों का जबरन धर्म परिवर्तन रोकने में नाकाम पाक सरकार

नई दिल्लीः पाकिस्तान पर अकसर अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान की सासंदीय समिति की रिपोर्ट को लेकर पाक सरकार एक बार फिर सवालों के कठघरे में है।

दरअसल पाकिस्तान की संसद ने अल्पसंख्यकों के जबरन धर्म परिवर्तन के मसले पर एक संसदीय समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता पाक संसद अनवर-उल-हक काकर कर रहे हैं।

समिति द्वारा हाल ही में पाकिस्तान के सिंध पारंत में दौरे के दौरान कई जबरन धर्म परिवर्तन के मामले सामने आए हैं। समिति के अनुसार पाकिस्तान जबरन धर्मांतरण से धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी करने में विफल रहा है।

वहीं मीडिया से रूबरू होते हुए समिति के अध्यक्षक काकर के मुताबिक, पाकिस्तान जबरन धर्मांतरण से धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर पाया है। हालांकि, अधिकतर मामलों में कुछ हद तक रजामंदी भी सामने आई है। जबरन धर्मांतरण की कई परिभाषाएं हैं और समिति ने इस पर व्यापक चर्चा की है।

काकर ने कहा कि, बेहतर जीवनशैली के लिए हुए धर्मांतरण को जबरन धर्मांतरण माना जाता है, लेकिन आर्थिक कारणों से हुए धर्मांतरण को शोषण माना जा सकता है क्योंकि यह सहमति से होता है।

काकर की अध्यक्षता में बनी इस मसिति ने जबरन दर्म परिवर्तन रोकने के लिए पाक कानून में विवाह के लिए नए नियमों को लागू करने का सुझाव दिया है, जिसमें शादी के समय अभिभावक की मौजूदगी को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया गया है।

Related Articles

Back to top button