पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर को लेकर फिर चली नई चाल, जिम्मेदारी से सिखों को हटाया

सिख गुरूद्वारा प्रबंधक समिती से देखरेख की जिम्मेदारी को वापस लेकर उसे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट को दे दिया गया है।

नई दिल्ली: पाकिस्तान ने करतारपुर गुरूद्वारे को लेकर फिर एक नई चाल चली है। करतारपुर गुरूद्वारे की देखभाल के लिए जिस सिख समूह के हाथों में जिम्मेदारी दी गई थी पाकिस्तान सरकार ने प्रबंधन का काम उनसे वापस ले लिया है। अब करतारपुर गुरूद्वारा प्रबंधन का काम एक नयी संस्था करेगी।

सिख गुरूद्वारा प्रबंधक समिती से देखरेख की जिम्मेदारी को वापस लेकर उसे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट को दे दिया गया है। इस फेर बदल में सबसे खास बात यह है कि जिस टीम को करतारपुर गुरूद्वारे की देख रेख के लिए रखा गया है उसमें एक भी सिख समुदाय का व्यक्ति नही है।

मैनेजमेंट टीम में नही हैं एक भी सिख

गुरूद्वारे की देखरेख के लिए सौंपी गई प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम में कुल नौ सदस्य इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETBP) से संबंध रखते हैं। लोगो का यह मानना है कि यह बोर्ड आईएसआई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के दिशा-निर्देशों पर काम करती है। इसे आईएसआई ही कंट्रोल करती है।

करतारपुर गुरूद्वारे से पैसा कमाएगी पाकिस्तान

पाकिस्तान सरकार की करतारपुर गुरूद्वारे के लिए किए गए इन बदलावों का एक कारण यह भी है कि पाकिस्तान सरकार गुरूद्वारे से अब पैसा कमाना चाहती है। पाकिस्तान अब इस धार्मिक स्थल से व्यापार करना शुरू करेगी। उसने इसके लिए प्रोजेक्ट भी तैयार कर लिया है। पाकिस्तान सरकार के दिए गए आदेशों में बिजनेस प्लान की भी बात की गई है। नियुक्त की गई टीम के सीईओ मो. तारीक खान को चुना गया है।

सिखों के पहले गुरू का निवास स्थान है करतारपुर

करतारपुर गुरूद्वारा सिखों के पहले गुरू गुरूनानक देव का निवास स्थल है। गुरूनानक देव का निधन भी इसी स्थान पर हुआ था। इस धार्मिक स्थल को पहले बन्द रखा गया था और लोग दूरबीन के सहारे गुरूद्वारे के दर्शन करते थे। परन्तु भारत और पाकिस्तान की सरकार ने मिलकर करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण किया जिससे कि अब श्रद्धालु आसानी से गुरूद्वारे के दर्शन कर सकते हैं।

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