पाकिस्तान की पार्टी ने खोली सरकार और सेना के रिश्तों की पोल, भारत के साथ व्यापार की वकालत

नई दिल्लीः इन दिनों वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की सरकार और सेना के बीच रिश्तों की सुगबुगाहट खासा सूर्खियों में हैं। पाक सत्ता के ऊपर सेना के इशारों पर चलने के कयासों के बीच पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने भी इन आरोपों पर मुहर लगा दी है।

दरअसल पाकिस्तान की मशहूर पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) ने पाक सराकार  को सेना के हुकुम पर चलने की बात कबूली है और साथ ही भारत के साथ व्यापार करने की भी वकालत की है।

पाकिस्तान में हाल ही में आयोजित एक सम्मेलन में पीपीपी के प्रवक्ता और पूर्व सांसद फरहातुल्ला बाबर कहा है कि, ‘पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रही है, जो एक संघीय एवं लोकतांत्रिक प्रणाली में शायद संभव नहीं है और यही देश में ‘धीरे-धीरे तख्तापलट’ का कारण है।’

वर्चुअल कांफ्रेंस के द्वारा आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए बाबर ने कहा कि, ‘पाकिस्तान के जनरल देश के संविधान को दिल से स्वीकार नहीं करते है। इसलिए उन्होंने राष्ट्र में ऐसी स्थिति पैदा की है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सेना को सभी संस्थाओं से ऊपर रखती है।’

वहीं बाबर ने भारत के साथ व्यापार पर बात करते हुए कहा कि, ‘यदि संघर्षों के बावजूद चीन और भारत के बीच व्यापार संबंध हो सकते हैं, तो पाकिस्तान ऐसा क्यों नही कर सकता?’ जाहिर है बाबर का इशारा भारत-पाक व्यापारिक रिश्तों को बेहतर बनाने की तरफ था।

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