खस्ताहाल इकोनॉमी के चलते कंगाल हो जाएगा पाकिस्तान, चीन का लोन भी नहीं पाएगा बचा

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इस्लामाबाद। पाकिस्‍तान चीन से लगातार कर्ज ले रहा है। साथ ही पड़ोसी देश में राजनीतिक हालत भी ठीक नहीं है। सेना और सरकार के बीच खींचतान लगातार जारी है। ऐसे में पाकिस्‍तान पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। पाकिस्तानी रुपये की वैल्‍यू इंटरनैशनल मार्केट में लगातार गिर रही है।देखा जाए तो पाकिस्तान में जब 2013 में मुस्लिम लीग नवाज सत्ता में आई तब उसके बड़े-बड़े वादे भी नज़र आ रहे थे। उन बड़े वादों में देश की ध्वस्त अर्थव्यवस्था भी शामिल थी। जिसको ध्यान में रखते हुए पीएमएल-एन ने इस संकट को सुधारने की बात कही थी।

साथ ही यह आश्वासन भी दिया था कि आर्थिक वृद्धि दर को भी बढ़ाया जाएगा और ऊर्जा संकट को भी पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। उस वक्त की बात करें तो बताया जाता है कि अर्थव्यवस्था बिल्कुल खत्म हो चुकी थी और आर्थिक वृद्धि गिर कर 3.5 पर पहुंच गई थी। इन सब गिरावटों के चलते विदेशी मुद्र भंडार भी बिल्कुल जर्जर हो चुका था।

जानकारी के मुताबिक जिस वर्ष पीएमएल-एन सत्ता में आई उस वक्त केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार 6.5 अरब डॉलर था, गौरतलब यह पिछले 10 सालों से अपने निम्नतम स्तर पर था। डिफॉल्ट होने की आंशका में सरकार ने सितंबर 2013 में IMF से 6.68 अरब डॉलर की मदद ली थी जिससे कि अर्थव्यवस्था में स्थिरता लायी जा सके और बड़े सुधार किए जा सके। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 5 साल बाद पाकिस्तान फिर से उसी स्थिति में पहुंच गया है। पिछले तीन दशकों में पाकिस्तान 12 बार IMF की शरण में जा चुका है और 13वीं बार IMF की मदद लेने की तरफ आगे बढ़ रहा है लेकिन पाकिस्तान की सरकार यह दावा कर रही है कि अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरी है।

दक्षिण-पश्चिम चीन को पाकिस्तान से होते हुए अरब सागर से जोड़ने की CPEC परियोजना के तहत पाक में विकास परियोजनाओं पर भारी-भरकम खर्च हुआ है। देश भर में पावर प्लांट बनाने पर ही करीब 36 बिलियन डॉलर खर्च हुआ। इनमें से अभी से ही कुछ पावर प्लांट बिजली संकट से जूझने लगे हैं। जिसकी वजह से पाक पर काफी गहरा संकट मंडरा रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले हफ्ते पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा कम होकर 9.66 अरब डॉलर थी। इसकी तुलना अगर पिछले साल से की जाए तो 2017 में यह 16.4 अरब डॉलर थी और 2016 में विदेशी मुद्रा भंडार 18.1 अरब डॉलर था। खबरों की माने तो पाकिस्तान इस साल चीन से 5 अरब डॉलर का कर्ज ले चुका है। साथ ही पाकिस्तान ने कई व्यवासायिक बैंकों से भी 2.9 अरब डॉलर का कर्ज लिया है।

बात करें चीन की तो वह कभी नहीं चाहता था कि पाकिस्तान किसी आर्थिक संकट से गुज़रे और उसकी 60 अरब डॉलर की महात्वाकांक्षी परियोजना सीपीआसी पर कोई असर पड़े। इन सब आंकड़ों और बातों को ध्यान में रखते हुए कहा जा रहा है कि चीन का दिया हुए कर्ज पाकिस्तान के संकट को कम नहीं कर सकता है। ऊपर-ऊपर से तो सब कुछ ठीक होता दिख रहा है लेकिन विश्लेषक किसी गंभीर संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।

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