LGBTQ कम्युनिटी की बहुत बड़ी अचीवमेंट है पाकिस्तान का पहला ट्रांस मदरसा

इस्लामाबाद : अपने सर को एक लम्बी सी चादर से ढक कर बच्चों को कुरान पढ़ाने वाली रानी खान पाकिस्तान की पहली ट्रांसजेंडर (LGBTQ)मदरसा टीचर हैं। पाकिस्तान के इस पहले स्पेशल मदरसे को उन्होंने अपनी ज़िंदगी भर की पूंजी से शुरू किया है।

पाकिस्तान की कट्टर मुस्लिम आबादी में यह मदरसा LGBTQ कम्युनिटी के अचीवमेंट में मील के पत्थर जैसा है जहाँ न बाहरी समाज के भद्दे ताने हैं न सिर्फ ट्रांसजेंडर्स पर लगाई गई मज़हबी पाबंदियां।

घरवाले तक कर देते है नज़रअंदाज़

रायटर्स को दिए इंटरव्यू में खान कहती हैं की अभी भी ज़्यादातर लोग, यहाँ तक हमारे अपने परिवार के लोग भी हमें एक्सेप्ट नहीं करते और जैसे ही उन्हें हमारी जैसे लोगों की असलियत (LGBTQ)का पता चलता है।  वे उन्हें अपने घरों से बाहर फेंक देते हैं।

जैसे की वो कोई कचरा हो। अपने आंसुओं को बड़ी मशक्कत से रोकते हुए खान ने बताया की उन्हें ये इतनी बेहतर तरीके से इस लिये पता है क्यों की उन के साथ भी ऐसा हो चुका है।13 साल की उम्र में transgender होने की वजह से घरवालों ने उन्हें सड़क पर फ़ेंक दिया था। उन्होंने बताया की तब उन्हें करीब चार साल भीख मांग खाना पड़ा था।

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इस वजह से शुरू किया था मदरसा

उन्होंने बताया इस मदरसे को खोलने की वजह एक सपना था जिस में हाल ही में मरी उनकी अज़ीज़ दोस्त ने रोते हुए उनसे कुछ ऐसा करने को कहा था जिससे सारी कम्युनिटी को फ़ायदा पहुंचे। तब उन्होंने अपने इस दो कमरों के मदरसे की शुरुआत की थी। वह कहती हैं कि स्कूल को अभी तक पाकिस्तान सरकार से कोई हमदर्दी नहीं मिली है।

हालांकि कुछ अधिकारियों ने छात्रों को नौकरी खोजने में मदद करने का वादा किया है। इसी लिए मैं बच्चों को क़ुरान के साथ साथ सिलाई और कढ़ाई करना भी सिखा रही हूँ ताकि इनको मेरी तरह किसी का मुहताज न होना पड़े।

कानूनी अधिकार तो हैं फिर भी हैं हाशिये पर

पाकिस्तान की संसद ने कागज़ों पर 2018 में तीसरे लिंग को मान्यता दी थी,जिस से उन को वोटिंग की आज़ादी तो मिली फिर भी  देश में ट्रांसजेंडर हाशिये पर हैं, और उन्हें अक्सर अपना जीवन काटने के लिए भीख, नृत्य और वेश्यावृत्ति का सहारा लेना पड़ता है।

इस्लामाबाद के डिप्टी हमजा शफकत ने रायटर्स को दिए बयान में कहा की यह बहुत अच्छी पहल है ये मदरसा समज के इन दबे कुचले लोगों को मेनस्ट्रीम सोसाइटी में लेन में बड़ा मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा की मुझे उम्मीद है कि अगर आप दूसरे शहरों में इस मॉडल को दोहराते हैं, तो चीजें जल्द बेहतर सकती हैं।

इसी कोशिश के बाद हाल ही में ट्रांसजेंडर लोगों के लिए एक धार्मिक बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी खोला गया है। पाकिस्तान की 2017 की जनगणना में लगभग 10,000 ट्रांसजेंडर लोगों की गिनती दर्ज की गई है, हालांकि ट्रांस राइट्स ग्रुप्स का कहना है कि यह गिनती 220 मिलियन के देश में 300,000 से ज़्यादा हो सकती है।

 

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