Paush Purnima: संगम तट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, जानें क्या होता है कल्पवास?

पौष पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, इसके साथ ही संगम की रेती पर कल्पवास की शुरूआत

प्रयागराज: प्रयागराज (Prayagraj) के संगम तट पर पौष पूर्णिमा का स्नान शुरू हो गया है। इसी के साथ संगम की रेती पर माह भर के कल्पवास की शुरूआत भी हो गयी है। मोक्ष की कामना रखने वालों को लिए पौष मास की पूर्णिमा का खास महत्व होता है।

नक्षत्रों का राजा 

पौष पूर्णिमा के पर्व पर प्रयागराज के संगम तट पर गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी में स्नान करने के साथ-साथ दान और पुण्य का खास महत्व होता है। इस बार पौष पूर्णिमा का गुरूवार दिन और पुष्य नक्षत्र में पड़ने से इसका महत्व काफी बढ़ गया है। पुष्य नक्षत्रों को 27 नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। इस दिन नक्षत्रों का संयोग पूर्ण संयोग बन रहा है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ‘पुष्य नक्षत्र’ में खरीदी गई कोई भी वस्तु बहुत लंबे समय तक उपयोगी रहती है और शुभ फल प्रदान करती है। इसलिए पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है।

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क्या होता है कल्पवास?

कल्पवास (Kalpavas) करने के लिए भक्त प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास करते हैं इस समय भक्त कुछ महीने तक तट पर ही रहते हैं। भक्त सूर्योदय के समय गंगा नदी में एक पवित्र डुबकी लगाते हैं और सूर्य भगवान जी का प्रार्थना करते हैं। कल्पवासी अनन्त सत्य की खोज में और आध्यात्मिकता के उच्चतम रूप को प्राप्त करने के लिए मोक्ष (पिछले जन्म से पापों को दूर करने) को प्राप्त किया जाता है।

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