मीन राशि के लोग जरूर पढ़ें ये खबर, खुल सकते हैं भाग्य के दरवाजे

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लखनऊ। आइये जानें मीन राशि वाले लोगों का मुख्य रत्न व उपरत्न क्या है, साथ ही विधि व धरण करने से लाभ तथा धारण करने का बीज मंत्र।

(दी, दू, थ, झ, दे, दो, चा,ची)
मीन(Pisces):- मीन राशि का स्वामी ग्रह है गुरु यानी बृहस्पति ग्रह है अतः मीन राशि वाले लोगों पुखराज धारण कर सकते है ।

उपरत्न:- पुखराज का उप रत्न सुनहला होता है।

पुखराज की विशेषता तथा धारण करने से होने वाले लाभ:- पुखराज पहनने से गुरु ग्रह के समस्त दोष शांत हो जाते हैं।मीन राशि वाले तथा धनु राशि वाले लोगों को पुखराज पहनना अति शुभकरी होता है। पुखराज धारण करने से बल, बुद्धि, आयु, स्वास्थ्य , यश, कीर्ति व मानसिक शान्ति की प्राप्ति होती है। इसको धारण करने से व्यापार तथा नौकरी में वृद्धि होती है। पुखराज को बृहस्पति जी का प्रतीक माना गया है, बृहस्पति जी को देव गुरु का स्थान प्राप्त है, इसी कारण इन्हें पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में उन्नति का कारक माना जाता है।यदि जिन कन्याओं के विवाह में बिलम्ब हो रहा हो तो पुखराज धारण करने से सीघ्र ही विवाह सुलभ हो जाता है।

पुखराज परिवार के सभी सदस्यों के साथ प्रेम के रिश्ते के बढ़ाता है

पति सुख के लिए पुखराज धारण करना श्रेष्ठ होता है, यह पति-पत्नी के बीच की बाधा को दूर कर गृहस्थ जीवन को सफल व सुखी बनाता है।पुखराज मानसिक शान्ति प्रदान करके मां-प्रतिष्ठा को उत्तम करके दीर्घायु प्रदान करता है।यह लेखक, वकील, व्यवसायियों के लिए विशेष लाभ करी होता है।

पुखराज परिवार के सभी सदस्यों, भाई, बहन, माता-पिता, कुटुम्ब व सभी रिश्तों में प्रेम बढ़ता है। पुखराज का स्वमी गुरु होने के कारण इसे साधु, सन्यासी, महात्मा सभी धारण कर सकते हैं।पुखराज अपने धारणकर्ता के गौरव को बढ़ाकर रुके हुवे कार्यों को पुनः सुरु करवाता है व मित्रता को साझेदारी को बल प्रदान करता है। पुखराज रत्न चर्म रोग नासक बल-वीर्य की वृद्धि करने वाला होता है।

पुखराज धारण करने की विधि:- पुखराज कम से कम सवा तीन रत्ती का या इससे ऊपर का पहनना चाहिए। पुखराज 5, 7,9,11 रत्ती का शुभ होता है। पुखराज को सोने ,चाँदी या अष्टधातु में जड़वाना चाहिए। पुखराज को गुरुवार के दिन पंचामृत व गंगाजल से पवित्रता के साथ स्नान कराकर प्रातः सूर्योदय से 11 बजे या किसी विद्वान के निर्देशन में केले के वृक्ष से स्पर्श कराकर दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली में पूर्व या ईशान कोंण की ओर मुख करके धारण करना चाहिए।

धारण करने का मंत्र :-
किसी ज्योतिर्विद के निर्देशन में कम से कम 108 बार ॐ गुं गुरुवे नमः मन्त्र से अभिषिक्त कर धारण करना चाहिए।

विशेष:- पुखराज जिस दिन धारण किया जाए उस दिन से यह चार वर्ष तीन माह अठारह दिन तक अपना अधिक प्रभाव प्रदर्शित करता है।

।।आचार्य स्वामी विवेकानन्द।।
।।श्री अयोध्या धाम।।
ज्योतिर्विद
संपर्क सूत्र:-9044741252

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