जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदने की इजाजत, उमर-महबूबा ने बीजेपी को घेरा

अगर आप जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदने की सोच रहे है तो अब आपका इंतजार खत्म हो गया हैं। अब अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन और अचल संपत्ति को खरीद सकते हैं।

जम्मू कश्मीर : अगर आप जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदने की सोच रहे है तो अब आपका इंतजार खत्म हो गया हैं। अब अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन और अचल संपत्ति को खरीद सकते हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में बड़ा संशोधन किया है, साथ ही नए कानून को लेकर नोटिफाई करते हुए केन्द्र शासित प्रदेश को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ दिया है। जम्मू-कश्मीर में अब देश का कोई भी नागरिक अपने घर या कारोबार के लिए जमीन खरीद सकता है। इस कानून से पहले देश के अन्य राज्यों के लोगो को जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदने की इजाजत नहीं थी सिर्फ वही के लोग खरीद सकते थे।

आपको बता दे कि केन्द्र सरकार ने पिछले साल 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35-ए के प्रावधान को खत्म कर दिया था। इसके बाद इस बात की पूरी संभावना थी कि जल्द ही कश्मीर में जमीन की खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। 2019 से पहले देश के किसी अन्य राज्य का कोई भी नागरिक चाहकर भी जम्मू-कश्मीर में अपने घर, दुकान, कारोबार या खेतीबाड़ी के लिए जमीन नहीं खरीद सकता था। जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने यह साफ किया कि नया कानून कृषि भूमि पर लागू नहीं होगा।

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उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके विरोध जताया

सरकार के इस बड़े कदम के बाद वहां की पार्टियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके विरोध जताते हुए कहा- “जम्मू कश्मीर में जमीन के खरीदने व मालिकाना हक में संशोधन हमे अस्वीकार्य है। यहां तक कि गैर कृषि भूमि की खरीद और कृषि भूमि का ट्रांसफर आसान बनाने के बाद डोमिसाइल का टोकनिज्म दूर कर दिया गया है। जम्मू कश्मीर अब बिक्री के लिए है और गरीब व छोटे मालिकों को नुकसान होगा।”

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लोगों को रोटी और रोजगार देने के सभी मोर्चे पर बीजेपी विफल

उधर महबूबा मुफ्ती ने भी ट्वीट करके खड़े व्यक्त करते हुए कहा- “लोगों को रोटी और रोजगार देने के सभी मोर्चे पर बीजेपी विफल रहने के बाद भोले-भाले मतदाताओं को लुभाने के लिए ऐसे कानून को बनाया है। इसके साथ ही महबूबा ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा, इस तरह के कठोर कदमों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के सभी तीन प्रांतों के लोगों को एकजुटता से लड़ने की ज़रूरत हैं।”

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