पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा- मुस्लिम अपने धर्मगुरु की बात मानते हैं, न कि मोदी की

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नई दिल्ली: आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को पीएम मोदी द्वारा मुस्लिम महिलाओं के समर्थन में दिए गए उस बयान का विरोध किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अब मुस्लिम महिलायें बिना मेहरम (पुरुष अभिभावक) के हज यात्रा कर सकती हैं। मुस्लिम लॉ बोर्ड ने मोदी के इस बयान पर नाराजगी जाहिर की है। मुस्लिम लॉ बोर्ड के सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल हामिद अजहरी ने कहा है कि 99 प्रतिशत आदमी और मुसलमान अपने धर्म का वैसा ही पालन करते हैं जैसा कि उनके धर्मगुरु कहते हैं, ना कि पीएम मोदी जी या कोई और जैसा कहता है।

अब्दुल हामिद अजहरी ने कहा कि यह एक धार्मिक मसला है, ऐसा मामला नहीं है कि जिसे की संसद में लाया जाए और उस पर कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम महिला बिना पुरुष साथी के तीन दिन या फिर 78 मील से ज्यादा सफर नहीं कर सकती है, चाहे वह हज जाना हो या कहीं दूसरी जगह।

मौलाना ने कहा कि यदि एक महिला के पास पुरुष अभिभावक नहीं है और उसके पास मेहरम को हज पर ले जाने के लिए पैसे भी नहीं हैं तो उसे अकेले जाने की इजाजत है।

आपको बता दें कि मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 2017 के अंतिम संस्करण में रविवार को कहा कि मैंने देखा है कि अगर कोई मुस्लिम महिला हज यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वह बिना ‘महरम’ (एक पुरुष संरक्षक) के नहीं जा सकती। उन्होंने कहा था कि मोदी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय ने यह प्रतिबंध हटा लिया है और अब मुस्लिम महिलाओं को बिना किसी पुरुष संरक्षक के हज यात्रा करने की अनुमति होगी।

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