लोक व निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश मामले में याचिका खारिज

न्यायमूर्ति आलोक सिंह और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने याची नूतन ठाकुर की याचिका पर यह आदेश दिया. यााचीका में याची ने उत्तर प्रदेश लोक व निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश-2020 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी.

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने लोक व निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश-2020 की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका को निष्फल करार देते हुए उसे खारिज कर दी है.

इस मामले में प्रदेश सरकार की तरफ से दायर जवाब में कहा गया कि कश्मीर में धारा 370 हटने पर आतंकवाद बढ़ने तथा सेना व पुलिस पर हमले बढ़ने पर सुरक्षा को लेकर अध्यादेश जारी हुआ था लिहाजा यह एक्ट बनाना जरूरी था.

न्यायमूर्ति आलोक सिंह और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने याची नूतन ठाकुर की याचिका पर यह आदेश दिया. यााचीका में याची ने उत्तर प्रदेश लोक व निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश-2020 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी. याची का कहना था कि इस अध्यादेश के प्रावधान मनमाने व संवैधानिक मंशा के खिलाफ है लिहाजा यह असंवैधानिक घोषित किए जाने के  लायक था. यह अध्यादेश, राजधानी में बीते दिसंबर माह में हुई हिंसा मामले के बाद इसी साल जारी किया गया था. याची का कहना था कि हिंसा व विरोध प्रदर्शन में हुई सरकारी व निजी सम्पत्ति की क्षति की वसूली की कारवाई भी सरकार कर रही है. कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को पक्ष पेश करने को कहा था.

राज्य सरकार की तरफ से जवाबी हलफ़नामा दाख़िल कर कहा गया कि उक्त अध्यादेश उच्चतम न्यायालय की 2009 की एक नजीर में दिए गये दिशा निर्देशों के पालन में जारी किया गया. हलफनामे के अनुसार अनुच्छेद 370 के हटाये जाने के बाद विदेश पोषित धरना, प्रदर्शन, दंगा, हिंसा, आतंकवाद आदि की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई तथा सेना, पुलिस बल तथा सरकारी भवन एवं वाहनों को क्षति पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ी. अनंतनाग में हमला, दिल्ली दंगे तथा लखनऊ में सीएए व एनआरसी को लेकर विरोध प्रदर्शन इसी के उदाहरण थे. इन्हीं परिस्थितियों में राज्य की संपत्ति तथा धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए यह अध्यादेश पारित किया गया.

याची के मुताबिक़ अध्यादेश के बाद इस संबंध में अधिनियम पारित हो गया. इससे, अध्यादेश के प्रभाव शून्य हो जाने के कारण उच्च न्यायालय ने याचिका को निष्फल करार देकर खारिज कर दिया.

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