अब किताबों में चाचा चौधरी के साथ आए पीएम मोदी, विपक्ष का विरोध शुरू

नई दिल्ली। कहा जाता है शिक्षा किसी भी व्यक्ति को एक बेहतरीन राह दिखाती है। लेकिन ज़रा सोचिए अगर उस शिक्षा को भी राजनीति बना दी जाए तो क्या हाल होगा? ऐसा ही कुछ शिक्षा को लेकर राजनीतिक हड़कंप इन दिनों देखने को मिल रहा है। हाल ही में शिक्षा को एक मार्केटिंग औज़ार की तरह इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप भी लगा है। यह आरोप लगाया है एनसीपी नेता सुप्रीयो सुले ने।

क्या है मामला-
इन दिनों डायमंड कॉमिक्स की तरफ से एक किताब प्रकाशित की गई है। इन किताबों को राज्य सरकार ने खरीदकर सरकारी स्कूलों में बंटवाने का आदेश दिया है। कहा जा रहा है इन किताबों को पहली से पांचवी कक्षा तक के बच्चों को सहायक सामग्री के तौर पर बांटा जाएगा तथा इसे उनके स्लेबस के तौर पर पढ़ाया जाएगा। खबरों की माने तो किताब पीएम मोदी पर आधारित है और इसका नाम चाचा चौधरी और नरेन्द्र मोदी रखा गया है। राज्य सरकार ने लगभग 1000 कॉमिक्स खरीदकर स्कूलों में बंटवाई है।

सुप्रिया सुले ने सरकार पर बोला हमला-
सरकार की इस हरकत पर एनसीपी नेता सुप्रीया सुले ने कटाक्ष करते हुए कहा है कि अब हद हो गई, बच्चों की शिक्षा को भी मार्केटिंंग का एक औजार बना दिया गया है। शिक्षा एक बेहद गंभीर मुद्दा है, इसे इस तरह से इस्तेमाल करके बेहद शर्मनाक हरकत की गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उन्होंने यह बयान देते हुए कोई कसर नहीं छोड़ी।

आगे उन्होंने नरेन्द्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि किताब में स्वच्छता का संदेश दिया है जो एक अच्छी बात है। फिर भी उन्हें अगर स्वच्छता का संदेश बच्चों तक पहुंचने के लिए अगर किसी छवि की जरूत थी तो उन्होंने संत गाडगे महाराज का इस्तेमाल क्यों नहीं किया?

सरकार क्या समझती है कि नरेंद्र मोदी ही एक ऐसे व्यक्ति रह चुके है जो इसके बारे में खुल कर बता सकते है। सबसे दुखद बात यह है कि सरकार इसे अपने फायदे के लिए एक राजनीतिक विज्ञापनबाजी के लिए प्रयोग में ला रही है। इतने साल हो गए लेकिन हमने ऐसा नहीं किया हमें लगता है कि कम से कम शिक्षा जैसे अहम मुद्दें को इससे से दूर रखा जाना चाहिए।

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