पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी ने भरी 2019 की हुंकार, कहा- पूंजीपतियों की मर्जी से चल रहा है बंगाल

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नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र अब पीएम मोदी ने भी अपनी कमर कस ली है। इस कड़ी में उन्होंने ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में कदम रखा। हाल ही में हुए उपचुनावों में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद वे यहां दो दिन के दौरे पर आए हैं। यहां उन्होंने मिदनापुर शहर में एक रैली को संबोधित किया। इस रैली में उनका मुख्य फोकस आगामी लोकसभा चुनावों पर रहा। यहां उन्होंने किसानों के हित में किये गए केंद्र के कार्यों को गिनाया। साथ ही ममता सरकार और वामपंथी दलों को भी निशाने पर लिया।

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पीएम मोदी

बता दें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की 29 जून को पुरुलिया जिले में हुई जनसभा के महज 17 दिन बाद ही मिदनापुर में प्रधानमंत्री की यह रैली हो रही है।

शाह ने अपनी रैली में दावा किया था कि उनकी पार्टी बंगाल में 42 लोकसभा सीटों में से 22 से अधिक पर जीत दर्ज करेगी।

भगवा पार्टी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में अपनी स्थिति मजबूत की है और राज्य में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी है और राज्य के हाल में हुये पंचायत चुनावों में उपचुनावों में वह मजबूत बनकर उभरी है।

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खबरों के मुताबिक़ इस दौरान पीएम मोदी ने हाल ही में खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के केंद्र के फैसले के बारे में लोगों को जानकारी दी। उनकी यह रैली मिदनापुर कॉलेज ग्राउंड में हुई।

उन्होंने कहा कि हमने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए बांस को पेड़ की जगह घास माना जिससे किसान खेत में उसे उगा सकता है और काट कर बेच सकता है।

उन्होंने कहा। “बंगाल में हुए पंचायत के चुनावों में हिंसा और आंतक का माहौल होने के बाबजूद जिस प्रकार से बंगाल की जनता ने भाजपा को समर्थन दिया है उसके लिए मैं जनता को धन्यवाद देता हूं।”

उन्होंने कहा, “सिंडिकेट की मर्जी के बिना पश्चिम बंगाल में कुछ भी करना मुश्किल हो गया है। ये सिंडिकेट है जबरन वसूली का, ये सिंडिकेट है किसानों से उनका लाभ छीनने का, ये सिंडिकेट है अपने विरोधी की हत्या करने वालों का, ये सिंडीकेट है गरीब पर अत्याचार करने का।

पीएम मोदी ने अपनी बातों में आगे कहा, “किसान को लाभ नहीं, गरीब का विकास नहीं, नौजवान को नए अवसर नहीं, ‘जगाई उन्नयन और मधाई उन्नयन’ पश्चिम बंगाल की अब नई पहचान बनता जा रहा है।”

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उन्होंने कहा, “दशकों के वामपंथी शासन ने पश्चिम बंगाल को जिस हाल में पहुंचाया, आज बंगाल की हालात उससे भी बदतर होती जा रही है।”

वे बोले कि बंगाल में नई कंपनी खोलनी हो, नए अस्पताल खोलने हों, नए स्कूल खोलने हों, नई सड़क बनानी हो, बिना सिंडिकेट को चढ़ावा दिए, उसकी स्वीकृति लिए, कुछ भी नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि मां-माटी-मानुष की बात करने वालों का पिछले 8 साल में असली चेहरा, उनका सिंडिकेट सामने आ चुका है। सिंडिकेट की मर्जी के बिना पश्चिम बंगाल में कुछ भी करना मुश्किल हो गया है। बंगाल में सिंडिकेट शासन चला रहा है, यहां तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता और गांव हमारे देश की आत्मा हैं। कोई भी समाज तब तक आगे नहीं बढ़ सकता। अगर देश का किसान उपेक्षित हों तो कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता है।

वहीं उन्होंने किसानों के हित की बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने हमेशा उनकी दशा और दिशा दोनों को सुधरने का हमेशा प्रयास किया है।

इसके लिए सरकार ने बांस को पेड़ों की जगह घास माना, ताकि किसान उसे अपने खेतों में उगा के काट सके और उसे बेंचकर बिना किसी मुश्किल के कुछ पैसे कमा सकें।

वहीं उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे इस दिशा में कार्य कर रहे हैं ताकि किसानों को उनका हक़ मिल सके।

उन्होंने बताया कि हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया गया है जो पश्चिम बंगाल में किसानों को और भी मजबूत करने का काम किया।

उन्होंने कहा कि किसानों को दिया जाने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। हम 22 हजार किसानों को अपग्रेड करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। हमारी सरकार किसानों की सरकार है।

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