लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 145वीं जयंती पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने विश्व की सबसे उंची मूर्ती ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पाजंलि अर्पित की। देश में पहली सी-प्लेन सेवा का शुभारंभ

गुजरात: भारत के राष्ट्रीय एकता और अखंडता के मार्ग दर्शक ‘आयरन मैन सरदार वल्लभभाई पटेल’ की 145वीं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में विश्व की सबसे उंची मूर्ती ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पाजंलि अर्पित की।

सरदार वल्लभभाई पटेल का इतिहास

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर को सन् 1875 में गुजरात के ‘नडियाद’ में एक ‘लेवा पटेल’ कि जाति में हुआ था। सरदार वल्लभभाई पटेल झवेरभाई पटेल और लाडबा देवी की चौथी संतान थे। वल्लभभाई पटेल एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने भारत के ‘पहले उप-प्रधानमंत्री’ के रूप में अपना कार्य किया। वे एक भारतीय अधिवक्ता और कुशल राजनेता थे। और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और भारतीय गणराज्य के संस्थापक भी थे। उन्होंने ने स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में अपनी अहम भूमिका निभाई और देश के राष्ट्रीय एकता और अखंडता में मार्गदर्शन का काम किया। सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु 75 साल की उम्र में 15 दिसंबर 1950 को हुआ था।

सी-प्लेन सेवा का शुभारंभ

पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर देशवासियों को दिया ‘सी-प्लेन सेवा’ का तौफा। प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीटर हैंडल पर ट्वीट कर कहा ‘आज सरदार सरोवर से साबरमती रिवर फंट तक सी-प्लेन सेवा का शुभारंभ होने जा रहा है’। सरदार साहब के दर्शन के लिए , स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए अब सी-प्लेन सर्विस का भी विकल्प मिलेगा। ये सारे प्रयास इस क्षेत्र में पर्यटन को भी बहुत ज्यादा बढ़ाने वाले है।

सी-प्लेन सेवा क्या है?

सी-प्लेन सेवा देश की पहली ऐसी विमान सेवा होगी जिसकी लैंडिग जमीन पर नही होगा बल्कि पानी में ही होगी। सी-प्लेन को अपनी उड़ान भरने के लिए 300 मीटर रनवे की आवश्यकता होती है।

सी-प्लेन की ख़ासियत

  • सी-प्लेन की ख़ासियत यह है कि ये जमीन और पानी दोनों में ही अपनी उड़ान भर सकता है।
  • सी-प्लेन 300 मीटर लंबे किसी भी तालाब या जलाशय में हवाई पट्टी के रूप में अपनी उड़ान भर सकता है।
  • सी-प्लेन में एक बार में केवल 19 ही यात्री बैठ सकते है।
  • सी-प्लेन बेहद हल्का होता है, और कम ईंधन में भी अपनी उड़ान भर सकता है।
  • इस सी-प्लेन से आप साबरमती से केवड़िया सिर्फ 30 मिनट में ही पहुंच जायेंगे।

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