AMU में बोले पीएम मोदी, पूरी दुनिया की नजर नए भारत पर

जिस सदी को भारत की बताया जा रहा है, उस लक्ष्य की तरफ भारत कैसे आगे बढ़ता है, इसे लेकर सब उत्सुक हैं।

नई  दिल्ली:  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बोले पीएम मोदी पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। जिस सदी को भारत की बताया जा रहा है, उस लक्ष्य की तरफ भारत कैसे आगे बढ़ता है, इसे लेकर सब उत्सुक हैं। इसलिए हम सबका एकनिष्ठ लक्ष्य ये होना चाहिए कि भारत को आत्मनिर्भर कैसे बनाएं। पीएम मोदी ने कहा कि पिछली शताब्दी में मतभेदों के नाम पर बहुत समय पहले ही जाया हो चुका है। अब समय नहीं गंवाना है, सभी को एक लक्ष्य के साथ मिलकर नया भारत, आत्मनिर्भर भारत बनाना है।

मोदी ने कहा कि हमें ये समझना होगा कि सियासत, समाज का एक अहम हिस्सा है। लेकिन समाज में सियासत के अलावा भी दूसरे मसले हैं। सियासत और सत्ता की सोच से बहुत बड़ा, बहुत व्यापक, किसी भी देश का समाज होता है। राजनीति से ऊपर भी समाज को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जगह होती है। उस जगह को भी खंगालते रहना बहुत ज़रूरी है।

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उन्होंने नये भारत की परिकल्पना की व्याख्या करते हुए कहा, “न्यू इंडिया के विजन के मूल में यही है कि राष्ट्र के, समाज के विकास को राजनीतिक चश्मे से ना देखा जाए। जब हम इस बड़े उद्देश्य के लिए साथ आते हैं तो संभव है कि कुछ तत्व इससे परेशान हों। ऐसे तत्व दुनिया के हर समाज में मिल जाएंगे। ये कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनके अपने स्वार्थ होते हैं। वो अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए हर हथकंडा अपनाएंगे, हर प्रकार की नकारात्मकता फैलाएंगे। लेकिन जब हमारे मन और मस्तिष्क में नए भारत का निर्माण सर्वोच्च होगा तो ऐसे लोगों की जगह अपने आप सिकुड़ती जाएगी।”

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देश की योजनाएं हर वर्ग, हर मजहब के लिए

उन्होंने कहा कि आज देश जो योजना बना रहा है वो बिना किसी मत मजहब के भेद के हर वर्ग तक पहुँच रही हैं। बिना किसी भेदभाव, 40 करोड़ से ज्यादा गरीबों के बैंक खाते खुले। बिना किसी भेदभाव, 2 करोड़ से ज्यादा गरीबों को पक्के घर दिए गए। बिना किसी भेदभाव 8 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को गैस मिला। बिना किसी भेदभाव आयुष्मान योजना के तहत 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज संभव हुआ। जो देश का है वो हर देशवासी का है और इसका लाभ हर देशवासी को मिलना ही चाहिए, हमारी सरकार इसी भावना के साथ काम कर रही है।

उन्होंने एएमयू की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि एएमयू कोई ईंट पत्थर इमारत नहीं हैं, इसके साथ शिक्षा का जो इतिहास जुड़ा है वो भारत की अमूल्य धरोहर है। आज एएमयू से तालीम लेकर निकले लोग भारत के श्रेष्ठ संस्थानों ही नहीं दुनियाभर में छाए हुए हैं। विदेश यात्राओं के दौरान यहां के पढ़े छात्र मिलते हैं, जो गर्व से बताते हैं कि वो एएमयू से हैं। अपने 100 वर्ष के इतिहास में एएमयू ने लाखों जीवन को तराशा है, संवारा है। समाज के लिए देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा जागृत की है। एएमयू की ये पहचान और इस सम्मान का आधार वो मूल्य रहे हैं, जिन पर सर सैयद अहमद खां द्वारा इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी।

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