पीएम मोदी ने कहा- आत्मनिर्भर भारत अभियान विश्व कल्याण का मार्ग है 

प्रधानमंत्री ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के शताब्दी समारोह में आभासी संबोधन के माध्यम से कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान विश्व कल्याण का मार्ग भी है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि विश्व-भारती विश्वविद्यालय के लिए गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का दृष्टिकोण आत्मनिर्भर भारत का मूल तत्व भी है। प्रधानमंत्री ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के शताब्दी समारोह में आभासी संबोधन के माध्यम से कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान विश्व कल्याण का मार्ग भी है। यह अभियान भारत को सशक्त और समृद्ध बनाकर विश्व की समृद्धता का अभियान है।

पीएम मोदी ने कहा कि विश्व-भारती की 100 वर्ष की यात्रा बहुत विशेष है और यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। विश्वविद्यालय मां भारती के लिए गुरूदेव के विचार, दृष्टिकोण और परिश्रम का मूर्त रूप है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की गुरूदेव की ओर से निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में विश्व-भारती, श्रीनिकेतन और शांतिनिकेतन निरन्तर प्रयास कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा देश पूरे विश्व में विश्व-भारती से निकले संदेश को फैला रहा है। भारत अंतरराष्ट्रीय सौर-गठबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत पेरिस समझौते के पर्यावरण लक्ष्यों को प्राप्त करने में सही दिशा में चलने वाला एक मात्र बड़ा देश है।

पीएम मोदी ने विश्वविद्यालय स्थापना की परिस्थितियों को याद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के लक्ष्य इस विश्वविद्यालय के लक्ष्य के अनुरूप थे लेकिन यह भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव काफी पहले रखी गयी। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को शताब्दियों से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा प्राप्त हुई। भक्ति आंदोलन ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत बनाया। भक्ति काल के दौरान भारत के प्रत्येक क्षेत्र के संतों ने देश की चेतना जगाये रखने का प्रयास किया।

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रामकृष्ण परमहंस के कारण भारत को स्वामी विवेकानंद मिले

पीएम मोदी ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस के कारण भारत को स्वामी विवेकानंद मिले। स्वामी विवेकानंद ने समर्पण के क्षेत्र को बढ़ाते हुए प्रत्येक व्यक्ति में देवत्व देखा तथा व्यक्ति और संस्थान सृजन पर बल देते हुए कर्म को अभिव्यक्ति दी। भक्ति आंदोलन काल के दौरान देश भर के महान संतों ने मजबूत आधारशिला रखी। भक्ति आंदोलन से हम एकजुट हुए, ज्ञान आंदोलन ने हमें बौद्धिक शक्ति दी और कर्म आंदोलन ने अपने अधिकारों के लिए लड़ने का साहस दिया। इन आंदोलनों से प्रभावित होकर हजारों लोग स्वतंत्रता संघर्ष में बलिदान देने के लिए आगे आए।

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हमारे स्वतंत्रता संघर्ष को बहुत बड़ी प्रेरणा मिली

उन्होंने छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, रानी सिनेम्मा, भगवान बिरसा मुंडा के कार्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की जनता गुलामी और साम्राज्यवाद से लड़ रही थी। अन्याय और शोषण जब चरम पर था तब सामान्य नागरिकों ने कर्म यानी दृढ़ता और बलिदान को अपनाया और इससे भविष्य में हमारे स्वतंत्रता संघर्ष को बहुत बड़ी प्रेरणा मिली।

 

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