टूट गई पीएम मोदी की सबसे बड़ी उम्मीद, ऐन वक्त पर गच्चा दे गया ये साथी देश

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी के चर्चे किसी से छिपे नहीं हैं। बार-बार सीज फायर का उल्लंघन और पाक में आतंकवाद को बढ़ावा देने की खबरें आए दिन सुर्खियां बनी रहती हैं। ऐसे में अपना याराना निभाते हुए पड़ोसी देश चीन भी भारत के खिलाफ अपने सुर बुलंद करता रहता है। इसी कड़ी में हिंद महासागर बेहद अहम है, जिस पर चीन भारत को बार-बार घेरने की कोशिश करता है।

चीन के इस रुख को खत्म करने के लिए भारत ने साल 2015 में बड़ा कदम उठाते हुए पड़ोसी द्वीपीय देश सेशेल्स में एक नौसैनिक सैन्य अड्डा बनाने का समझौता किया था। लेकिन अब सेशेल्स के राष्ट्रपति ने सैन्य अड्डा बनाने की बात वाले समझौते को नकार दिया है, जिसे भारत के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

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हिंद महासागर

सेशेल्स के साथ हुआ यह समझौता भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम था। इसकी वजह हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी है।

गौरतलब है कि सेशेल्स का असेम्पशन द्वीप, जिस पर भारत नौसैनिक अड्डा बनाना चाहता था, वह हिंद महासागर के समुद्री रुट पर स्थित है।

ऐसे में भारत सेशेल्स के असेम्पशन द्वीप पर तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर कूटनीतिक बढ़त बनाना चाहता है, लेकिन अब सेशेल्स द्वारा इस समझौते से पीछे हटने से भारत की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है।

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खबरों के मुताबिक़ सेशेल्स के राष्ट्रपति ने ऐलान किया है कि अब सेशेल्स में भारत का नौसैनिक अड्डा नहीं बनेगा। फिलहाल भारत, सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे के बयान को समझने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि साल 2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स के दौरे पर गए थे। इस दौरे पर दोनों देशों के बीच सेशेल्स के असेम्पशन द्वीप पर भारत का नौसैनिक अड्डा बनाने के मुद्दे पर सहमति बनी थी।

हालांकि उस वक्त यह समझौता गुप्त रखा गया था, लेकिन कुछ समय पहले यह समझौता लीक हो गया जिसके बाद इस समझौते के खिलाफ सेशेल्स की विपक्षी पार्टियां और पर्यावरणविदों ने विरोध करना शुरु कर दिया। इसके बाद सेशेल्स के राष्ट्रपति ने भारी विरोध के चलते इस समझौते को रद्द करने का फैसला किया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे ने कहा कि “असेम्पशन द्वीप पर एक कोस्ट गार्ड सुविधा का निर्माण किया जाएगा और यह निर्माण खुद सेशेल्स करेगा, जिसके लिए अगले बजट में प्रावधान किया जाएगा। इस इलाके में यह मिलिट्री पोस्ट हमारी सुरक्षा के लिए बेहद अहम होगी।”

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उल्लेखनीय है कि सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे 25 जून को भारत के दौरे पर आ रहे हैं, लेकिन नौसैनिक अड्डे के मुद्दे पर इस दौरान कोई बातचीत प्रस्तावित नहीं है।

सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ‘हमने इस समझौते को विकसित करने में 3 साल का वक्त दिया है। यह सेशेल्स की समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम है, वहीं भारत की रणनीति के हिसाब से भी यह समझौता काफी अहम है। ऐसे में हमें यह देखना पड़ेगा कि इस समझौते के भविष्य को लेकर सेशेल्स के दिमाग में क्या चल रहा है।’

बता दें कि इससे पहले डैनी फॉरे ने यह ऐलान किया था कि वह भारत के नौसैनिक अड्डे वाले समझौते को सेशेल्स की संसद में रखेंगे और वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही इस पर आगे काम होगा। उल्लेखनीय है कि डैनी फॉरे की पार्टी संसद में बहुमत में नहीं है।

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