पीएमओ से आया फोन…और सड़क पर जलने लगी लाइट

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देहरादून। राजधानी में प्रशासनिक तंत्र किस कदर लचर हो चुका है इसका पता तब लगा जब एक स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिये पीएमओ हरकत में आया। जी हां शहर से सटी सड़क के कुछ किलोमीटर के हिस्से में बीते सात सालों से स्ट्रीट लाइट नहीं है। यहां के ग्रामीणों ने जिले से लेकर निगम और पंचायत प्रशासन तक से फरियाद की लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद यहां के लोगों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में शिकायत की। पीएमओ से केवल एक फोन आया और मेयर ने आनन-फानन में स्ट्रीट लाइट लगवा भी दी।

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दून शहर से केवल चार किलोमीटर दूर जोहड़ी और आस-पास के गांवों के करीब तीस हजार लोग बीते आठ सालों से स्ट्रीट लाइट की मांग कर रहे हैं। इस गांव में आने वाली करीब एक किलोमीटर की सड़क पर कोई स्ट्रीट लाइट नहीं है। ग्रामीणों को सुनसान रात में एक किलोमीटर का सफर तय करना बहुत भारी लगता है। समस्या का समाधान इसलिये भी नहीं हुआ क्योंकि नगर निगम इसे अपना क्षेत्र नहीं मान रहा और ग्राम पंचायत इसे शहरी क्षेत्र बता रही है।

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जोहड़ी गांव कहने को तो गांव है, लेकिन आफिसर्स कालोनी से सटा होने के कारण यहां से रोज आला अधिकारियों का आना-जाना लगा ही रहता है। बावजूद इसके किसी भी अधिकारी ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की। केवल जोहड़ी ही नहीं, आसपास के 18 गांवों की जनता भी यहां से रोज आवाजाही करती है। स्ट्रीट लाइट न होने से महिलाओं और बच्चों के अलावा पुरुष भी यहां से गुजरने से बचते हैं। ग्रामीणों के दबाव के चलते एमडीडीए ने वर्ष 2011 में सड़क पर खंभे लगवाये तो तो ऊर्जा निगम ने लाइन भी खींच दी, लेकिन सीमा विवाद के चलते लाइट की बहाली नहीं हो सकी।

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विद्युत का इंतजार कर थक चुके ग्रामीणों ने काफी जद्दोजहद के बाद मामले को पीएमओ तक पहुंचा दिया। पीएमओ में शिकायत दर्ज होते ही फौरन संज्ञान लिया गया और देहरादून नगर निगम के मेयर को फोन लगाया गया।

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इस संबंध में मेयर विनोद चमोली ने कहा कि उनके पास पीएमओ से फोन आया था। जिस क्षेत्र की शिकायत का जिक्र किया गया, वह निगम के अधीन नहीं, बल्कि पंचायत के अधीन आता है। लेकिन अब नगर निगम ही वहां स्ट्रीट लाइटें लगवाएगा। उन्होंने कहा कि मैंने ऊर्जा अनुभाग को फौरन स्ट्रीट लाइट लगाने के निर्देश दिये और अब उस सड़क पर लाइट लग चुकी है।

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